First Year – Scheme of Marks
Engagement with the Field: Tasks and Assignments for Courses 1–6 & 7A.
Course 1
बाल्यावस्था और उसका विकास
Childhood and Growing Up
Credit 4
Theory 80Practicum 20 Full Marks 100
इकाई 1 : बाल्यावस्था की समझ
- बाल्यावस्था की समझ : विकासात्मक परिप्रेक्ष्य
- बाल्यावस्था के आयाम : सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक एवं आर्थिक
- बाल्यावस्था के प्रमुख घटक : परिवार, पड़ोस, समुदाय एवं विद्यालय
- बालक एवं बाल्यावस्था : बिहार के वास्तविक संदर्भ में
- राष्ट्रीय लक्ष्य के संबंध में पूर्व बाल्यावस्था शिक्षा के सामान्य उद्देश्य
- आनन्दायी बाल्यावस्था की धारणा : मुख्य संवाद एवं शैक्षिक निहितार्थ
- वैयक्तिक विकास के आयाम : शारीरिक, संज्ञानात्मक, भाषिक, सामाजिक एवं नैतिक – इनके अंतःसम्बन्ध और शिक्षकों के लिए निहितार्थ (पियाजे, इरिक्सन और कोहलबर्ग के संदर्भ में)
इकाई 2 : किशोरावस्था की समझ
- किशोरावस्था : धारणा, रूढ़ि और समग्र रूप में समझ की आवश्यकता
- मुख्य मुद्दे : वृद्धि एवं परिपक्वता, स्वभाव एवं देख-भाल, निरंतरता एवं अनिरंतरता
- अध्येता के रूप में किशोर : शैशवावस्था से किशोरावस्था तक वृद्धि एवं विकास के विभिन्न चरण तथा विकासात्मक कार्य
- किशोरावस्था को प्रभावित करने वाले कारक : सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक व आर्थिक
- किशोरावस्था : क्रियाकलाप, महत्त्वाकांक्षा, अध्येता के द्वंद्व और चुनौतियाँ
- बिहार में किशोरों की प्रासंगिक सत्यता
- किशोरों के साथ व्यवहार : शिक्षकों, परिवार, समुदाय व राज्य की भूमिका पर संवाद
इकाई 3 : समाजीकरण एवं अध्येता संदर्भ की समझ
- सामाजिक समझ
- घर के संदर्भ में समाजीकरण : परिवार सामाजिक संस्था के रूप में, पालन-पोषण का ढंग और उसका प्रभाव, अभिभावकीय उम्मीदों एवं मूल्यों का प्रसारण
- समाज और समुदाय का संदर्भ : पड़ोस, विस्तारित परिवार, धार्मिक समूह एवं उनकी सामाजिक संक्रिया
- समाजीकरण और स्कूल का संदर्भ : विद्यालय प्रवेश का प्रभाव, विद्यालय एक सामाजिक संस्थान के रूप में और बिहार में इसकी धारणा, स्कूली संदर्भ में मूल्य का निर्धारण
- पहचान निर्माण की प्रक्रिया में विद्यालय की पढ़ाई-लिखाई, आरोपण, अभिग्रहण, विकास
- लिंग पहचान और समाजीकरण में : परिवार, स्कूल, औपचारिक और अनौपचारिक संगठन के अभ्यास, लड़कियों की पढ़ाई-लिखाई
- समाज में विषमताएँ एवं प्रतिरोध : दाखिला, धारण व बहिष्कार के मुद्दे
इकाई 4 : अध्येता में विभिन्नता की समझ
- सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ आधारित अध्येता-विभिन्नता : घरेलू एवं अनुदेश की भाषा का अध्येता पर प्रभाव, अध्येता के व्यक्तिगत ‘सांस्कृतिक पूँजी’ का प्रभाव
- अध्येता की व्यक्तिगत विभिन्नता : बहु-बुद्धि, सीखने के तरीके, स्व-अवधारणा, स्व-सम्मान, अभिवृत्ति, अभियोग्यता, कौशल व दक्षता, रुचि, मूल्य, नियंत्रण और व्यक्तित्व का स्थान विशेष
- अलग तरह से योग्य अध्येता की समझ : मन्द गति के अध्येता, डिस्लेक्सिक अध्येता
- व्यक्तिगत विभिन्नता आकलन के तरीके : जाँच, अवलोकन, निर्धारण-मापनी, स्व-प्रतिवेदन
- व्यक्तिगत विभिन्नता हेतु प्रबंधन : समूहन, वैयक्तिक अनुदेशन, निर्देशन एवं उपबोधन, सेतु पाठ्यक्रम, संवर्धन गतिविधियाँ और क्लब
इकाई 5 : अधिगमकर्ता पहचान का विकास
- पहचान निर्माण की समझ, विभिन्न सामाजिक एवं संस्थानिक संदर्भ में विभिन्न पहचानों का अविर्भाव, आंतरिक संसक्तता की जरूरत, द्वंद्व को व्यवस्थित करना
- समूह एवं व्यक्तिगत पहचान निर्माण के निर्धारक, सामाजिक कोटि – जैसे कि जाति, वर्ग, लिंग, धर्म, भाषा और आयु
- शिक्षकों एवं विद्यार्थियों में पहचान-निर्माण रूप में विद्यालय, विद्यालय संस्कृति एवं लोकाचार, शिक्षण अधिगम अभ्यास एवं वर्ग कक्ष में शिक्षक संवाद, मूल्यांकन अभ्यास
- मूल्य प्रणाली एवं विद्यालय की प्रच्छन्न पाठ्यचर्या
- समवय समूह, मीडिया, प्रौद्योगिकी एवं वैश्वीकरण का पहचान-निर्माण में प्रभाव
पाठ्य-पुस्तकें : बाल्यावस्था एवं उसका विकास — रीता चौहान / पी. डी. पाठक
Course 2
समकालीन भारत और शिक्षा
Contemporary India and Education
Credit 4
Theory 80Practicum 20 Full Marks 100
इकाई 1 : शिक्षा की अवधारणा तथा लक्ष्य की समझ
- अवधारणा : शिक्षा का अर्थ एवं परिभाषाएँ, शिक्षा की प्रक्रिया – विद्यालय, निर्देशन, प्रशिक्षण और भावना, शिक्षा का माध्यम – औपचारिक, अनौपचारिक और निरौपचारिक
- लक्ष्य : लक्ष्य के कार्य एवं अर्थ, शिक्षा के उद्देश्यों का वर्गीकरण, शिक्षा के उद्देश्यों को निर्धारित करना
- व्यक्तिगत संबंध में शिक्षा के उद्देश्य, समाज तथा राष्ट्र के संबंध में शिक्षा के उद्देश्य
- सामाजिक और वैयक्तिक उद्देश्यों के बीच दार्शनिक विरोधाभास और उसका संश्लेषण
इकाई 2 : भारतीय शिक्षा की मानकीय दृष्टि (झलक)
- भारतीय शिक्षा की मानकी व्यवस्था – एक ऐतिहासिक जानकारी
- शिक्षा के संवैधानिक प्रावधान जो भारतीय आदर्शों को प्रतिबिम्बित करते हैं : प्रजातंत्र, समानता, स्वतंत्रता, धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय
- एक उभरते हुए देश/प्रदेश के रूप में भारत : मुख्य विशेषताएँ – दृष्टि, प्रकृति और प्रजातांत्रिक एवं धर्मनिरपेक्ष राजनीति, संघीय संरचना : शैक्षणिक पद्धतियों के लिए उपयोगिता
- मानकी दृष्टि से निकाला गया शिक्षा के लक्ष्य और प्रस्ताव
- राष्ट्रीय विकास के लिए शिक्षा : शिक्षा आयोग (1964-66)
- उभरते हुए विचारधारा के बीच अन्तरापृष्ठ : (i) राजनीतिक प्रक्रिया और शिक्षा, (ii) आर्थिक विकास और शिक्षा, (iii) सामाजिक-सांस्कृतिक परिवर्तन और शिक्षा
इकाई 3 : शिक्षा की दार्शनिक दृष्टि और प्रणालियाँ
- शिक्षा और दर्शन : शिक्षा के अर्थ एवं परिभाषाएँ, दर्शन की शाखाएँ और उनका शैक्षिक समस्याओं और मुद्दों से संबंध
- दार्शनिक प्रणालियाँ : दर्शन का सम्प्रत्यय – आदर्शवाद, प्रकृतिवाद, प्रयोजनवाद, मार्क्सवाद और मानवतावाद, विशेष रूप से वास्तविक ज्ञान, मूल्य एवं उनकी शैक्षिक उपयोगिताएँ, उद्देश्य, पाठ्यक्रम, शिक्षण विधियाँ अनुशासन के संदर्भ में
इकाई 4 : शिक्षा की दार्शनिक झलक : शैक्षणिक विचारक
- शिक्षा दर्शन एवं व्यवहार के महत्त्वपूर्ण गुणधर्म का संक्षिप्त विवरण निम्न विचारकों के अनुसार –
- भारतीय विचारक : रवीन्द्रनाथ टैगोर, महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानन्द, अरविंदो घोष, डॉ. कृष्णमूर्ति, गिजु भाई बधेका
- पाश्चात्य विचारक : प्लेटो, रूसो, डीवी, फ्रॉबेल और मारिया मॉन्टेसरी
इकाई 5 : समकालीन भारतीय सम्प्रदाय : सम्बन्ध और मुद्दे
- विद्यालयी शिक्षा का सार्वभौमिकरण – शिक्षा का अधिकार और सुगमता, मुद्दे : सार्वजनिक पंजीयन, सार्वजनिक अवरोधन, सार्वजनिक सफलता
- गुणवत्ता एवं समानता के मुद्दे – शारीरिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक सुलभता के सन्दर्भ में, विशेष रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों, छात्राओं और सक्षम बच्चों की भिन्नता की चर्चा
- शैक्षिक अवसर की समानता : समानता और संवैधानिक प्रावधानों का अर्थ, असमानता के रूप और उसकी प्रकृति
- साम्प्रदायिक असमानता – विद्यालयों में : निजी विद्यालय, शहरी और ग्रामीण विद्यालय, एकल शिक्षक विद्यालय और बहुत प्रकार के रूपों में असमानताएँ, विद्यालय पद्धतियों में और दलवाहिनी के नेतृत्व की प्रक्रिया
- सामान्य विद्यालयों की पद्धति की विचारधारा
- शिक्षा विधेयक और उसके प्रावधानों के अधिकार
पाठ्य-पुस्तकें : समसामयिक भारत और शिक्षा — पूनम मदान
Course 3
अधिगम और शिक्षण
Learning and Teaching
Credit 4
Theory 80Practicum 20 Full Marks 100
इकाई 1 : अधिगम – प्रकृति, प्रकार और कौशल
- अवधारणा और अधिगम की प्रकृति : अधिगम अवधारणा, अधिगम कौशल, मौखिक अधिगम, सामाजिक अधिगम, मुख्य अधिगम, समस्या-समाधान
- अधिगम सिद्धांतों की प्रासंगिक आधारभूत संकल्पनाएँ और विश्लेषण – व्यावहारिक, सामाजिक, संज्ञानात्मक और मानवीय अधिगम सिद्धांत
- ज्ञान के संरचना की प्रक्रिया के रूप में अधिगम : अधिगम के संरचनात्मक उपागम
- विद्यालयी कुशलता हेतु अधिगम का संबंध और अधिगमकर्ता की क्षमता
इकाई 2 : अधिगम प्रबन्ध और अधिगम को प्रभावित करने वाले कारक
- अभिप्रेरणा की अवधारणा : प्रकार, अभिप्रेरणा की वृद्धि करने वाली प्रविधियाँ
- स्वास्थ्य, नींद, काम करने में कठिनाइयाँ, विषय-वस्तु एवं अध्ययन की आदतें – अधिगम को प्रभावित करने वाले कारक के रूप में
- अधिगम की विधि पर प्रभाव : भाग या सम्पूर्ण अधिगम, अल्पज्ञ और अधिक गहराई से अध्ययन : वर्तमान अधिगम पर पूर्व अधिगम का प्रभाव : अधिगम के स्थानान्तरण के लिए रणनीतियाँ
- कक्षा-कक्ष में अधिगम का विस्मरण – अर्थ और इसके कारण; अधिगम स्मृति को बढ़ाने हेतु रणनीतियाँ
इकाई 3 : शिक्षक और शिक्षण की समझ
- शिक्षण क्या है? शिक्षण एक योजनाबद्ध क्रियाविधि – योजना के तत्त्व
- शिक्षण और शिक्षण की योजना पर पड़ने वाले प्रभाव की कल्पना
- शिक्षण में प्रवीणता : अर्थ और जागरूकता का स्थान, कौशल, योग्यता और वृद्ध निश्चय
- प्रभावी शिक्षण की कल्पना : व्यवहारिकतावादी, मानवतावादी और रचनात्मकवादी दृष्टिकोण
- शिक्षकों की भूमिका एवं कार्य का विश्लेषण : पूर्व क्रियाशील अवस्था (कल्पना, परिणाम तैयार करना, संगठन पर निर्णय), वर्तमान/अन्तःक्रियाशील अवस्था (अधिगम का व्यवस्थित प्रबंधन), पश्च क्रियाशील अवस्था (अधिगम परिणामों का आकलन)
- प्रभावी शिक्षकों से संबंधित विशेषताएँ, शिक्षकों की व्यावसायिक पहचान
इकाई 4 : शिक्षण के लिए योजना
- कल्पना : अधिगमकर्ता और विशिष्ट अधिगम उत्साह, विषय सामग्री, विषय सूची और उनका अंतः संयोजन, अधिगम स्रोत, उपागम/उपाय
- परिणाम पर निर्णय देना : सामान्य निर्देशित लक्ष्य की स्थापना, उद्देश्यों का विशेष विवरण और अधिगम के लिए मानक, विभिन्न क्रियाशीलता/काम के लिए अनुदेशित समय का निर्धारण
- अनुदेशन उपागम एवं उपाय पर निर्णय : विवरण या अन्वेषण, व्यक्तिगत या छोटे समूह या सम्पूर्ण वर्ग
- अनुदेशन के लिए तैयारी : उपलब्ध अधिगम स्रोतों की पहचान एवं चुनाव और विकसित आवश्यक अधिगम स्रोतों की पहचान
- योजना का निर्माण : इकाई योजना और पाठ योजना
इकाई 5 : कौशल एवं शिक्षण की युक्तियाँ
- पाठ का परिचय : आवश्यकता और विभिन्न संभावनाएँ
- अधिगमकर्ता की अभिप्रेरणा और उनकी विद्यता पर ध्यान देना – उद्दीपक परिवर्तन का महत्त्व एवं पुनर्बलन का कौशल
- प्रश्नोत्तर, उदाहरण सहित व्याख्या, वर्णन : शिक्षक योग्यता, कक्षा कक्ष में छात्र अधिगम को प्रभावित करने के रूप में
- शिक्षण की युक्ति : (a) विवरण उपाय शिक्षण उपागम के रूप में – प्रस्तुतीकरण, वार्तालाप, प्रदर्शन, प्रगति, सुझाव, नमूना; (b) शिक्षण चिन्तन कौशल और ज्ञान की संरचना के उपागम के रूप में – पूछताछ एक उपाय : संकल्पना निर्माण, आगमनात्मक चिन्तन, समस्या आधारित अधिगम/परियोजना आधारित अधिगम
- वैयक्तिक निर्देशन का निष्कर्ष : संगणक व्यवस्थित अनुदेशन, कार्यक्रम अनुदेशन और अधिगम क्रियाशीलता संपृक्ति
- छोटे समूह और सम्पूर्ण वर्ग के अनुदेशन पर चर्चा : सहयोगात्मक और सहयोग के निष्कर्ष पर अधिगम, मस्तिष्क उद्वेलन, भूमिका निर्वहन और नाटकीकरण, समूह चर्चा, अनुकरण और खेल
पाठ्य-पुस्तकें : अधिगम एवं शिक्षण — ज्योत्सना / पी. डी. पाठक
Course 4
भाषागत या भाषायी पाठ्यक्रम
Language across the Curriculum
Credit 2
Theory 40Practicum 10 Full Marks 50
इकाई 1 : अधिगमकर्ता और उनकी भाषा
- भाषा का अर्थ, विभिन्न रूप, तंत्र एवं गुणधर्म
- विद्यालय प्रवेश के पहले अधिगमकर्ता की भाषा पूँजी
- स्कीनर, चोमस्की, पियाजे और वायगोत्स्की के विशेष प्रसंग में छात्र भाषा कैसे सीखता है?
- आत्मसात् भाषा और सीखने की भाषा में अन्तर
- सामाजिक एवं सांस्कृतिक : भाषा का संदर्भ, भाषा एवं लिंग, भाषा एवं पहचान, भाषा एवं शक्ति, भाषा एवं कक्षा (समाज)
- भाषा का राजनीति सन्दर्भ : भारत एवं बिहार का बहुभाषायी दृष्टिकोण, भारत में भाषा से सम्बन्धित संवैधानिक प्रावधान
इकाई 2 : विद्यालय पाठ्यक्रम में भाषा
- गृह भाषा एवं विद्यालयी भाषा : समझ का माध्यम (छात्र की अपनी भाषा)
- भाषा को सीखने में केन्द्रीयता
- भाषायी पाठ्यक्रम : पाठ्यक्रम में भाषा की भूमिका एवं महत्त्व
- भाषा और उसके ज्ञान की संरचना, भाषाओं के सीखने के उद्देश्य और उसकी समझ, कल्पना, रचनात्मकता, संवेदनशीलता, कौशल विकास
- विद्यालयी विषय के रूप में भाषा सीखने के साधन के रूप में, भाषा तथा भाषा संचार में अन्तर
- अनुदेशन के माध्यम का आलोचनात्मक सिंहावलोकन, विभिन्न विद्यालयी विषयों की सूची
- बहुभाषायी कक्षाएँ, बहुभाषायी जागरूकता और भाषा शिक्षण
इकाई 3 : संवैधानिक प्रावधान और भाषा शिक्षा की नीतियाँ
- भारत में भाषा की स्थिति : अनुसूची 343-351 तथा 350 A
- कोठारी आयोग की संस्तुति (1964-66), शिक्षा की राष्ट्रीय नीति–1986, कार्यक्रम का कार्य (POA) 1992 के कार्यक्रम का कार्य
- राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा–2005 (भाषा शिक्षा)
पाठ्य-पुस्तकें : पाठ्यक्रम में भाषा — रोली द्विवेदी
Course 5
अनुशासन एवं विषयों की समझ
Understanding Disciplines and Subjects
Credit 2
Theory 40Practicum 10 Full Marks 50
इकाई 1 : अनुशासन और विषय की आधारभूत समझ
- अनुशासन क्या है? अनुशासन की अवधारणा के इतिहास को स्पष्ट करें
- शैक्षिक अनुशासन क्या है? अनुशासन और विषय के सन्दर्भ में मानवीय ज्ञान के वर्गीकरण का दृष्टिकोण की जरूरतों की विवेचना करें :
- 1. दार्शनिक सन्दर्भ : एकता और अनेकता
- 2. मानव ज्ञान के दृष्टिकोण से संस्कृति और जनजाति
- 3. सामाजिक सन्दर्भ : व्यवसायीकरण और कार्य का विभाजन
- 4. ऐतिहासिक सन्दर्भ : विकास और विभाजन
- 5. प्रबन्धकीय सन्दर्भ : बाजार और संगठन
- 6. अनुशासन और विषय के संदर्भ में : शिक्षण एवं अधिगम
- अनुशासन और विषय के बीच अन्तर : विषयों की प्रकृति और क्षेत्र
- विषयों की रुचि एवं दुर्बलता
- विषयों का दर्शन और बुनियादी परिसर
- राष्ट्रीय संदर्भ में विद्यार्थी के विकास हेतु विषय/अनुशासनों का उद्देश्य
इकाई 2 : योग्यता एवं अग्रसर होने के लिए अनुशासन/विषय
- विषयों में महारत
- विषयों के साथ संवाद
- विषय विशिष्ट शब्द और उनके उपयोग
- विषय के विशेष भेद एवं उसका प्रयोग, विषय में योजना/क्रियाशीलता
- विषय अनुशासन में अनुसंधान
- विषय में आँकड़ों को एकत्र करने की विधियाँ
- निष्कर्ष निकालना, सामान्यीकरण और सिद्धान्त
- विकास, पहचान/सम्बन्ध की तैयारी
- टिप्पणी और पुस्तकों की सूची
इकाई 3 : अन्तरानुशासनात्मक अधिगम और उससे सम्बन्धित मुद्दे
- अन्तरानुशासनात्मक अधिगम क्या है? अन्तरानुशासनात्मक अधिगम – एकवचनात्मक प्रक्रिया
- अन्तरानुशासनात्मक विषय क्या हैं?
- अन्तरानुशासनात्मक विषयों के सामान्य उद्देश्य क्या हैं? क्या अन्तरानुशासनात्मक विषयों में अनुशासनात्मक गंभीरता आवश्यक है?
- अन्तरानुशासनात्मक विषयों की योजना एवं संगठन का निर्माण कैसे करेंगे?
- अन्तरानुशासनात्मक अधिगम का आकलन कैसे कर सकते हैं?
- अन्तरानुशासनात्मक विषयों की गुणवत्ता के आश्वासन के लिए कौन-सी कसौटियाँ प्रयोग की जा सकती हैं?
पाठ्य-पुस्तकें : पाठ्यक्रम में विषयों की समझ — पायल भोला जैन
Course 6
लिंग, विद्यालय और समाज
Gender, School and Society
Credit 2
Theory 40Practicum 10 Full Marks 50
इकाई 1 : लिंग निर्माण – मूल संदर्भ संकल्पना
- लिंग, लैंगिकता, पितृसत्ता, पुरुषत्व और नारीवाद, लिंग पक्षपात, धारणा और समर्थ करना
- निष्पक्षता और समानता के सम्बन्ध में – जाति, वर्ग, धर्म, नैतिकता, अशक्तता एवं क्षेत्र
- नारी अध्ययन से सामान्य अध्ययन का स्थानान्तरण का प्रतिमान
- ऐतिहासिक भूमिका : 19वीं एवं 20वीं शताब्दी में स्त्री शिक्षा में सुधार सम्बन्धी पद चिह्न
- समकालीन अवधि : सुझाव की विभिन्न नीतियाँ – प्रोग्राम, योजना आयोग और समितियाँ
इकाई 2 : लिंग, शक्ति और शिक्षा
- लिंग और शिक्षा के सिद्धान्त : भारतीय अनुप्रयोग के सन्दर्भ में
- समाजीकरण सिद्धान्त, लिंग अन्तर संरचनात्मक और विनाशकारी सिद्धान्त
- लिंग तादात्म्य और समाजीकरण व्यवहार में – परिवार, विद्यालय, अन्य औपचारिक एवं अनौपचारिक संगठन
- लड़कियों की विद्यालय असमानता और प्रतिरोधकता (आगमन का निर्णय, अवरोधन और बहिष्करण)
इकाई 3 : पाठ्यक्रम में लिंग निर्माण
- लिंग, संस्कार और शिक्षण : विखण्डन का वर्ग, जाति, धर्म एवं क्षेत्र से पाठ्यक्रम और लिंग प्रश्न
- स्वतंत्रता के समय से, लिंग पाठ्यक्रम में संरचनात्मक ढाँचा विश्लेषण लिंग और छिपी पाठ्यचर्या
- मूलपाठ में लिंग और सन्दर्भ (आन्तणिवक मूलपाठ के साथ – अनुशासन, वर्ग-प्रक्रिया, शिक्षा-शास्त्र सहित)
- शिक्षण बदलने में अभिकर्ता
- जीवन कौशल और लैंगिकता
पाठ्य-पुस्तकें : लिंग, विद्यालय एवं समाज — प्रतिमा त्रिपाठी
Course 7A
विद्यालयी विषय का शिक्षणशास्त्र – भाग I
Pedagogy of a School Subject – Part I
Credit 2
Theory 40Practicum 10 Full Marks 50
छात्राध्यापक अपने दो शिक्षण विषयों में से प्रत्येक के लिए संबंधित विषय का पाठ्यक्रम पढ़ेंगे।
अंग्रेज़ी शिक्षण-विधि Teaching English
इकाई 1 : प्रकृति, क्षेत्र एवं उद्देश्य
- भारतीय संदर्भ में अंग्रेज़ी भाषा की भूमिका : औपनिवेशिक भाषा के रूप में, उत्तर-औपनिवेशिक काल में, ज्ञान की भाषा के रूप में; भारत में द्वितीय भाषा के रूप में अंग्रेज़ी की स्थिति
- भाषा सीखने के सामान्य सिद्धान्त (अंग्रेज़ी के विशेष संदर्भ में)
- अंग्रेज़ी सीखने के लाभ एवं महत्त्व
- अंग्रेज़ी शिक्षण के लक्ष्य एवं उद्देश्य
- विदेशी भाषा सीखने के घटक : ध्वनि प्रणाली, संरचनात्मक युक्तियाँ, शब्दावली
- भारत में अंग्रेज़ी शिक्षण की कठिनाइयाँ
इकाई 2 : अंग्रेज़ी का पाठ्यक्रम
- पाठ्यक्रम निर्माण का अर्थ एवं सिद्धान्त
- माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों (CBSE, ICSE, BSEB) में प्रचलित अंग्रेज़ी पाठ्यक्रम का समीक्षात्मक अध्ययन
- अंग्रेज़ी पाठ्यक्रम में सुधार : भाषा शिक्षण के संदर्भ में NCF-2005 एवं BCF-2008 का समीक्षात्मक मूल्यांकन
- भाषा शिक्षा के संवैधानिक प्रावधान एवं नीतियाँ : अनुच्छेद 343–351, 350A; कोठारी आयोग (1964-66); NPE-1986; POA-1992
- अंग्रेज़ी की पाठ्यपुस्तकें – महत्त्व एवं गुणवत्ता
इकाई 3 : विशिष्ट अनुदेशनात्मक रणनीतियाँ एवं शिक्षण विधि
- विधियाँ : आगमनात्मक, निगमनात्मक, व्याख्यान, परिचर्चा, व्याकरण-अनुवाद विधि, प्रत्यक्ष विधि, बहुभाषिक विधि – उनके लाभ, सीमाएँ एवं तुलना
- उपागम : संरचनात्मक उपागम एवं संप्रेषणात्मक उपागम
- शब्दावली शिक्षण के विशिष्ट तरीके एवं साधन
- पठन शिक्षण : अच्छे पठन के गुण, पठन के प्रकार, अच्छी एवं बुरी पठन-आदतें, बोधगम्यता विकसित करने की युक्तियाँ, पठन की विधियाँ
- लेखन कौशल विकास : लेखन के प्रकार, लेखन को प्रभावित करने वाले कारक, अच्छे लेखन के गुण (सरलता, तार्किक चिन्तन एवं संगठन की भूमिका)
पाठ्य-पुस्तकें : New Trends in Teaching of English — हेना सिद्दीकी
हिन्दी शिक्षण-विधि Teaching Hindi
इकाई 1 : प्रकृति, क्षेत्र और लक्ष्य
- हिन्दी भाषा के गुण-धर्म के आधार पर विशेष रूप से इसकी सार्वत्रिक सार्थकता : संस्कृति, सामाजिक, व्यावहारिक, साक्षरता एवं बहुभाषी
- हिन्दी शिक्षण में मातृभाषा और राष्ट्रीय भाषा का लक्ष्य एवं उद्देश्य
- हिन्दी के विभिन्न रूप : हिन्दी एक ज्ञान की भाषा के रूप में, हिन्दी – प्राथमिक, द्वितीय और तृतीय भाषा के रूप में, हिन्दी अन्तर्राष्ट्रीय भाषा के रूप में
- मातृभाषा शिक्षण में कठिनाइयाँ
इकाई 2 : हिन्दी का पाठ्यक्रम
- केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, भारतीय माध्यमिक शिक्षा परिषद और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में पाठ्यक्रम का अर्थ और सिद्धान्त
- हिन्दी पाठ्यक्रम में सुधार : भाषा शिक्षण के संदर्भ में राष्ट्रीय पाठ्यक्रम संरचना–2005, बिहार पाठ्यक्रम संरचना–2008 का समीक्षात्मक मूल्यांकन
- भाषा शिक्षा के संवैधानिक प्रावधान और नीतियाँ : भारत में भाषा की स्थिति, अनुच्छेद 343 से 351 तक, 350A, कोठारी आयोग (1964-66), राष्ट्रीय शिक्षा नीति–1986, कार्यक्रम का कार्य–1992
- हिन्दी में पाठ्यपुस्तकें – महत्त्व एवं गुणवत्ता
इकाई 3 : शिक्षण-विधि और विशिष्ट अनुदेशनात्मक तकनीकियाँ
- गद्य शिक्षण : कहानी, नाटक, निबंध और उपन्यास के लिए गद्य पाठ योजना में महत्त्वपूर्ण कदम
- कविता शिक्षण : कविता पाठ के उद्देश्य, कविता पाठ के महत्त्व, कविता शिक्षण की योजना में महत्त्वपूर्ण कदम
- व्याकरण शिक्षण : हिन्दी शिक्षण में व्याकरण का स्थान, आगमनात्मक और निगमनात्मक विधि और उससे संबंधित गुण
- वाचन शिक्षण : अच्छे वाचन की विशेषता, पठन (वाचन) के प्रकार – गम्भीर वाचन, द्रुत वाचन, विस्तृत वाचन, मौन वाचन, सस्वर वाचन; वाचन की विभिन्न विधियाँ – लय विधि, वर्णमाला विधि, शब्द विधि और वाक्य विधि
- शब्दावली शिक्षण : इसके अर्थ और प्रकार, मौखिक कार्य, वाद-विवाद द्वारा शब्दावली की रचना, वाक्य बनाना
- लेखन और संरचना शिक्षण : पत्र लेखन, निबंध लेखन और सारांश लेखन
पाठ्य-पुस्तकें : हिन्दी शिक्षण — रामशक्ल पाण्डेय
संस्कृत शिक्षण-विधि Teaching Sanskrit
इकाई 1 : प्रकृति, क्षेत्र और लक्ष्य
- भाषा – इसका अर्थ और कार्य; छात्र की शिक्षा में शास्त्रीय भाषा की भूमिका
- संस्कृत भाषा के विशिष्ट गुणधर्म (प्रारूप) और इसकी सर्वत्रिक सार्थकता – सांस्कृतिक, सामाजिकता, व्यावहारिकता, साक्षरता और बहुभाषाविशेषता
- शास्त्रीय भाषा के रूप में संस्कृत शिक्षण के उद्देश्य एवं लक्ष्य
- संस्कृत भाषा एवं साहित्य, संस्कृत भाषा एवं भारतीय भाषा, संस्कृत भाषा का सामाजिक-सांस्कृतिक महत्त्व, संस्कृत एक आधुनिक भारतीय भाषा के रूप में
- पुरातन और शास्त्रीय भाषा के शिक्षण में सिद्धान्त और कठिनाइयाँ
इकाई 2 : संस्कृत का पाठ्यक्रम
- पाठ्यक्रम संरचना के अर्थ और सिद्धान्त
- केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, भारतीय माध्यमिक शिक्षा परिषद और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में संस्कृत पाठ्यक्रम का आलोचनात्मक अध्ययन
- संस्कृत पाठ्यक्रम में सुधार : भाषा शिक्षण के सन्दर्भ में राष्ट्रीय पाठ्यक्रम संरचना–2005, बिहार पाठ्यक्रम संरचना–2008 का समीक्षात्मक मूल्यांकन
- भाषा शिक्षा के संवैधानिक प्रावधान और नीतियाँ : अनुच्छेद 343 से 351 तक, 350A, कोठारी आयोग (1964-66), राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986, कार्यक्रम का कार्य–1992
- संस्कृत में पाठ्यपुस्तकें – महत्त्व एवं गुणवत्ता
इकाई 3 : विशिष्ट निर्देशनात्मक तकनीकी एवं शिक्षण विधि
- गद्य शिक्षण : नाटक, कहानी और उपन्यास का शिक्षण, गद्य पाठ की योजना में महत्त्वपूर्ण कदम
- कविता शिक्षण : कविता पाठ के उद्देश्य, कविता पाठ का महत्त्व, कविता पाठ योजना में महत्त्वपूर्ण कदम
- व्याकरण शिक्षण : संस्कृत के शिक्षण में व्याकरण का स्थान, आगमनात्मक और निगमनात्मक विधियाँ और उनके सम्बन्धित गुण
- वाचन शिक्षण : अच्छे वाचन के गुण धर्म; वाचन के प्रकार – द्रुतवाचन, अनुकरण वाचन, गहन वाचन, विस्तृत वाचन, मौन वाचन, सस्वर वाचन; वाचन की विभिन्न विधियाँ – लय विधि, वर्णमाला विधि, शब्द विधि और वाक्य विधि
- शब्दावली शिक्षण : इसके अर्थ और प्रकार, मौखिक कार्य, वाद-विवाद द्वारा शब्दावली की रचना, वाक्य बनाना
- संरचना एवं लेखन का शिक्षण : पत्र लेखन, निबंध लेखन और सार लेखन
पाठ्य-पुस्तकें : संस्कृत शिक्षण — शिखा शर्मा / रामशक्ल पाण्डे
उर्दू शिक्षण-विधि Teaching Urdu
इकाई 1 : प्रकृति, क्षेत्र और लक्ष्य
- भाषा – इसके अर्थ एवं कार्य; बच्चों की शिक्षा में मातृभाषा की भूमिका
- उर्दू भाषा के विशेष प्रारूप (गुण-धर्म) और इसकी सार्वत्रिक सार्थकता – सांस्कृतिक, सामाजिक, व्यावहारिक, साक्षरता, एवं बहुभाषायी
- मातृभाषा के रूप में उर्दू शिक्षण का लक्ष्य एवं उद्देश्य
- भारत में उर्दू भाषा की भूमिका : विभाजन के पूर्व और पश्चात्, उर्दू के विभिन्न रूप (प्रकार); उर्दू एक ज्ञान की भाषा के रूप में, उर्दू प्रथम, द्वितीयक और तृतीयक भाषा रूप में, उर्दू अन्तर्राष्ट्रीय भाषा के रूप में
- मातृभाषा शिक्षण की कठिनाइयाँ
इकाई 2 : उर्दू का पाठ्यक्रम
- पाठ्यक्रम निर्माण का अर्थ एवं सिद्धान्त
- केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, भारतीय माध्यमिक शिक्षा परिषद और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में उर्दू पाठ्यक्रम का समीक्षात्मक अध्ययन
- उर्दू पाठ्यक्रम में सुधार : भाषा शिक्षण के संदर्भ में राष्ट्रीय पाठ्यक्रम संरचना–2005, बिहार पाठ्यक्रम संरचना–2008 का समीक्षात्मक मूल्यांकन
- भाषा शिक्षा के संवैधानिक प्रावधान और नीतियाँ : अनुच्छेद 343 से 351 तक, 350A, कोठारी आयोग (1964-66), राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986, कार्यक्रम का कार्य (पी.ओ.ए.) 1992
इकाई 3 : विशिष्ट अनुदेशनात्मक तकनीकियाँ और शिक्षण विधि
- गद्य शिक्षण की विधि : दास्तान, अफसाना, उपन्यास, नाटक, मकतूब और इन्शा; मुख्य रूप से गद्य पाठ योजना में महत्त्वपूर्ण कदम
- कविता शिक्षण की विधि : नज़्म, ग़ज़ल और रुबाई; कविता पाठ का उद्देश्य, कविता पाठ के महत्त्व, कविता योजना के मुख्य कार्य
- व्याकरण शिक्षण की विधि : उर्दू शिक्षा में व्याकरण का स्थान, आगमनात्मक और निगमनात्मक विधि और उसके सम्बन्धित गुण
- वाचन शिक्षण : अच्छे पाठन के गुण; वाचन के प्रकार – द्रुत वाचन, गम्भीर वाचन, मौन वाचन, सस्वर वाचन; वाचन की विभिन्न विधियाँ – लय विधि, वर्णमाला विधि, शब्द विधि और वाक्य विधि
- शब्दावली शिक्षण – इसके अर्थ और प्रकार
- लेखन और मिश्रित (रचना) कार्य का शिक्षण : खुतूत निगारी (पत्र लेखन), मज़मून निगारी (निबंध लेखन) और इख़्तेसार निगारी (सार लेखन)
पाठ्य-पुस्तकें : उर्दू शिक्षण — एम. एन. मक्की
इतिहास शिक्षण-विधि Teaching History
इकाई 1 : प्रकृति, महत्त्व और इतिहास शिक्षण पढ़ाने का उद्देश्य
- (अ) प्रकृति और महत्त्व : परिभाषित अवधारणाएँ एवं इतिहास के घटक
- भूगोल, नागरिक शास्त्र, अर्थशास्त्र, विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे अन्य विषयों के साथ इतिहास के विभिन्न पहलुओं के सह-सम्बन्ध
- इतिहास शिक्षण का महत्त्व
- (ब) लक्ष्य और उद्देश्य : इतिहास शिक्षण का सामान्य उद्देश्य
- इतिहास शिक्षण के उद्देश्य – शैक्षिक एवं व्यावहारिक और पाठ्यक्रम के साथ उनके सम्बन्ध
- ब्लूम वर्गीकरण का शैक्षिक उद्देश्य
इकाई 2 : इतिहास पाठ्यक्रम
- पाठ्यक्रम निर्माण का सिद्धान्त
- इतिहास पाठ्यक्रम और राज्य, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान प्रशिक्षण परिषद (एन.सी.ई.आर.टी.) पाठ्य पुस्तक विवाद; इतिहास पाठ्यक्रम – केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, आई.सी.एस.ई., बिहार विद्यालय परीक्षा समिति में इतिहास पाठ्यक्रम का मूल्यांकन करें
- ऐतिहासिक महत्त्व का चयन और उसके संगठन के – (A) सामान्य सिद्धान्त; (B) विशिष्ट सिद्धान्तों – सांस्कृतिक युग, ग्रन्थ सूची विषयक, कालानुक्रमिक (कालक्रमबद्ध), सामयिक (किसी स्थान सम्बन्धी), एकीकरण (सममेलन), संकेन्द्रिक, सर्पिल रेखा (कुंडली एवं इकाई के अनुसार)
- इतिहास की एक अच्छी पाठ्य पुस्तक के गुण बताएँ
- इतिहास के पाठ्यक्रम सुधार : एन.सी.एफ.–2005 के महत्त्वपूर्ण मूल्यांकन, सामाजिक विज्ञान शिक्षण के संदर्भ में बी.सी.एफ. 2008 की विवेचना करें
इकाई 3 : प्रशिक्षण, कार्यनीति एवं इतिहास शिक्षण की विधियाँ
- इतिहास शिक्षण की विधियाँ – विवेचनात्मक, निगमनात्मक विधि, कहानी कहने की विधि, व्याख्यान विधि, वाद-विवाद (परिचर्या) विधि, स्रोत विधि, परियोजना और समस्या समाधान (समाधानकर्ता) बताएँ
- शिक्षण की तकनीक (तरीके) – अनुकरण, खेल अवलोकन (निरीक्षण) विधि, केस अध्ययन, विचार मंथन, सामूहिक शिक्षण को स्पष्ट करें
- समूह में अधिगम – सहकारी और सहयोगी शिक्षण, विजातीय (विषम) कक्षा की जरूरतों को संबोधित करते हुए शिक्षण विधि को बताएँ
- इतिहास विवादास्पद विषय का अध्ययन है, स्पष्ट करें
पाठ्य-पुस्तकें : इतिहास शिक्षण — गुरसरनदास त्यागी
नागरिक शास्त्र शिक्षण-विधि Teaching Civics
इकाई 1 : नागरिकशास्त्र शिक्षण की प्रकृति, विषय क्षेत्र और उद्देश्य
- नागरिकशास्त्र की अवधारणा, अर्थ और परिभाषा
- माध्यमिक स्तर पर नागरिकशास्त्र शिक्षण की प्रकृति, विषय क्षेत्र और महत्त्व
- नागरिकशास्त्र का अन्य विद्यालयी विषय से जुड़ाव (संबंध)
- नागरिकशास्त्र शिक्षण और राष्ट्रीय राजनीति
- माध्यमिक स्तर पर नागरिक शास्त्र शिक्षण का सामान्य उद्देश्य
- माध्यमिक स्तर पर नागरिक शास्त्र शिक्षण का शैक्षिक और व्यावहारिक उद्देश्य
इकाई 2 : पाठ्यक्रम संरचना का सिद्धान्त
- पाठ्यक्रम का अर्थ और सिद्धान्त
- विशिष्ट रूप से B.S.E.B., C.B.S.C. और I.C.S.E. में माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पाठ्यक्रम में नागरिक-शास्त्र का स्थान
- नागरिक शास्त्र में पाठ्यक्रम सुधार – NCF-2005 के समीक्षात्मक अनुशंसा और सामाजिक विज्ञान शिक्षण के संदर्भ में BCF-2008 द्वारा अनुशंसा
- नागरिक शास्त्र पाठ्यक्रम का संगठन के उपागम के संबंध में सहसंबंध, एकीकरण, सकेन्द्री, सर्पिल रेखा (कुंडली) इकाई और समय के अनुसार पहुँच
- माध्यमिक स्तर के वर्तमान नागरिक शास्त्र के पाठ्यक्रम में त्रुटि
- नागरिकशास्त्र के मूल पाठ्य पुस्तक का महत्त्व और गुण
इकाई 3 : नागरिकशास्त्र शिक्षण की शैक्षणिक तकनीक
- शिक्षण की विधि : व्याख्यात्मक आधार – व्याख्या, तर्क-वितर्क, वाद-विवाद, कहानी वाचन विधि
- अनुसंधानात्मक आधारित – प्रयोगात्मक/पूछताछ/समस्या-समाधान/आलेख
- क्रियात्मक आधार – अनुकरण/खेल-कूद, निरीक्षण विधि, स्रोत विधि, केस अध्ययन, परियोजना विधि
- संगणक सहायतार्थ अनुदेशन, वैकल्पिक ज्ञान पर अधिकार, डाल्टन योजना
- सामूहिक अधिगम : सहकारी और सहयोगी शिक्षण, विषमजातीय कक्षा के लिए आवश्यक संबोधन
- शिक्षण की प्रविधियाँ : प्रश्नात्मक, नाटकीय रूपांतर, वार्तालाप, गतिविधियाँ, मस्तिष्क प्रक्षालन/बुद्धिशीलता
पाठ्य-पुस्तकें : नागरिकशास्त्र शिक्षण का प्रणाली विज्ञान — गुरसरनदास त्यागी
भूगोल शिक्षण-विधि Teaching Geography
इकाई 1 : भूगोल शिक्षण की प्रकृति, क्षेत्र और उद्देश्य
- भूगोल शिक्षण की प्रकृति, विषय क्षेत्र और महत्त्व : भूगोल विषय विज्ञान और कला के रूप में, विद्यालयी पाठ्यक्रम में भूगोल का स्थान
- भूगोल शिक्षण के मूल्य – नैतिक, सौंदर्य संबंधी, उपयोगी, व्यावहारिक, बौद्धिक, व्यावसायिक
- माध्यमिक विद्यालय स्तर पर भूगोल शिक्षण के उद्देश्य – बिहार के सन्दर्भ में
- व्यावहारिक अर्थ में शैक्षणिक उद्देश्यों का लेखन और उनके महत्त्व; ज्ञान, समझ, अनुप्रयोग, कौशल आदि के रूप में इनका वर्गीकरण
इकाई 2 : भूगोल पाठ्यक्रम
- पाठ्यक्रम विकास का अर्थ और सिद्धान्त
- माध्यमिक विद्यालय स्तर पर भूगोल पाठ्यक्रम का महत्त्वपूर्ण अध्ययन
- भूगोल के पाठ्यक्रम सुधार – NCF-2005 के समीक्षात्मक अनुशंसा और सामाजिक विज्ञान शिक्षण के सन्दर्भ में BCF-2008
- भूगोल विषय में समाजशास्त्र की विकासात्मक समीक्षा
- भूगोल की कक्षाओं में पाठ्यपुस्तकों और व्यावहारिक कक्षाओं का महत्त्व
इकाई 3 : भूगोल शिक्षण के उपागम और विधियाँ
- शिक्षण विधि – व्याख्यान विधि, परियोजना विधि, सर्वेक्षण विधि, प्रेक्षण विधि, प्रयोगशाला विधि, तुलना विधि, चित्र विधि
- शिक्षण के उपागम – आगमन-निगमन उपागम, वर्णनात्मक उपागम, क्षेत्रीय उपागम, वातावरणीय उपागम, शिक्षक केन्द्रित, शिक्षार्थी केन्द्रित, क्रिया केन्द्रित, पद्धतिमय उपागम
- भूगोल की समझ में पर्यटन और देशाटन का महत्त्व
- शिक्षण की विधियाँ – प्रश्नोत्तर, नाटकीकरण, भूमिका निर्वहन, विचार मंथन
पाठ्य-पुस्तकें : भूगोल शिक्षण — एच. एन. सिंह
अर्थशास्त्र शिक्षण-विधि Teaching Economics
इकाई 1 : अर्थशास्त्र शिक्षण की प्रकृति, विषय क्षेत्र और उद्देश्य
- अर्थशास्त्र का अर्थ, परिभाषा और अवधारणा
- माध्यमिक स्तर पर अर्थशास्त्र शिक्षण की प्रकृति, विषय क्षेत्र और महत्त्व
- अन्य विद्यालयी विषय के साथ अर्थशास्त्र का सम्बन्ध
- माध्यमिक स्तर पर अर्थशास्त्र शिक्षण का सामान्य उद्देश्य
- माध्यमिक स्तर पर अर्थशास्त्र शिक्षण का शैक्षणिक और व्यावहारिक उद्देश्य
- अर्थशास्त्र, भूमंडलीकरण, उदारीकरण, विश्व बैंक, सतत् विकास, सामाजिक न्याय और विकास की समझ
इकाई 2 : पाठ्यक्रम संरचना का सिद्धान्त
- पाठ्यक्रम संरचना का अर्थ और सिद्धान्त
- विशिष्ट रूप से बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और भारतीय माध्यमिक शिक्षा परिषद् के माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयी पाठ्यक्रम में अर्थशास्त्र का स्थान
- अर्थशास्त्र शिक्षण का विकसित तरीका
- अर्थशास्त्र पाठ्यक्रम में संगठन और उपागम के सह संबंध, एकीकरण, सकेन्द्री, सर्पिल रेखा (कुंडली), इकाई और समय के अनुसार पहुँच की समझ
- अर्थशास्त्र में पाठ्यक्रम सुधार, एन.सी.एफ.–2005 का समीक्षात्मक मूल्यांकन और बी.एस.एफ.–2008 सामाजिक विज्ञान शिक्षण के संदर्भ में समझ
इकाई 3 : अर्थशास्त्र शिक्षण की शैक्षणिक तकनीक
- वर्णनात्मक विधि – व्याख्या, वाद-विवाद, तर्क-वितर्क तथा कहानी-कथन विधि
- अन्वेषण विधि – प्रयोगात्मक/पूछ-ताछ/समस्या-समाधान, कार्य
- क्रियात्मक/गतिविधि आधारित विधि – अनुकरण/खेल-कूद, निरीक्षण विधि, स्रोत-विधि, केस अध्ययन, परियोजना विधि
- संगणक/कंप्यूटर सहायता अनुदेश – मापांक, दक्षता अधिगम, डाल्टन-योजना
- सामूहिक अधिगम – सहकारी और सहयोगी शिक्षण, विषमजातीय कक्षा के लिए आवश्यक सम्बोधन
- शिक्षण की तकनीक – प्रश्नात्मक, नाटकीय रूपांतर, वार्तालाप-गतिविधियाँ, मास्तिष्क प्रक्षालन/बुद्धिशीलता
पाठ्य-पुस्तकें : अर्थशास्त्र शिक्षण का प्रणाली विज्ञान — गुरसरनदास त्यागी
गृह विज्ञान शिक्षण-विधि Teaching Home Science
इकाई 1 : गृहविज्ञान शिक्षण के लक्ष्य और उद्देश्य
- गृहविज्ञान का अर्थ और उसके महत्त्व को जानना
- गृहविज्ञान का दर्शन – रूसो से आधुनिक युग तक
- गृहविज्ञान शिक्षण के लक्ष्य एवं उद्देश्य
- व्यावहारिक सन्दर्भ में उद्देश्यों का वर्गीकरण
- गृहविज्ञान के क्षेत्र (विस्तार) एवं घटक : स्वास्थ्य एवं सफाई, खाद्य और पोषण, गृह प्रबन्धन, भोजन का संरक्षण, बच्चों का पालन-पोषण, कपड़ा और पहनावा (संक्षिप्त परिचय)
इकाई 2 : पाठ्यक्रम और गृहविज्ञान की पाठ्य पुस्तक
- अर्थ एवं पाठ्यक्रम की परिभाषा
- सिद्धान्तों एवं पाठ्यक्रम के निर्माण का आधार
- स्कूलों में गृहविज्ञान के वर्तमान पाठ्यक्रम का मूल्यांकन
- गृहविज्ञान के पाठ्य-पुस्तक : कार्य और विशेषताएँ
- गृहविज्ञान में पाठ्यक्रम सुधार
इकाई 3 : शिक्षण सहायक एवं अन्य गतिविधियाँ
- गृहविज्ञान प्रयोगशाला : उपकरण एवं उसके रखरखाव
- माध्यमिक स्तर पर गृहविज्ञान शिक्षण में दृश्य-श्रव्य सहायक सामग्री – श्यामपट्ट, फलालैन बोर्ड एवं बुलेटिन बोर्ड, रेडियो, फिल्म, टी.वी. और कम्प्यूटर
- भ्रमण एवं यात्राओं की भूमिका
- सह पाठ्यक्रम गतिविधियाँ – समाजीकृत तकनीक, कार्यों की अपेक्षाएँ
- जाँच एवं खोज का दृष्टिकोण
पाठ्य-पुस्तकें : गृह विज्ञान शिक्षण — जी. पी. शैरी / डी. एन. श्रीवास्तव
वाणिज्य शिक्षण-विधि Teaching Commerce
इकाई 1 : वाणिज्य शिक्षा की प्रकृति, आवश्यकता और उद्देश्य
- वाणिज्य शिक्षा का अर्थ, प्रकृति, आवश्यकता एवं विषय क्षेत्र
- विद्यालय स्तर पर वाणिज्य विषय का ऐच्छिक विषय के रूप में समावेशन का न्यायीकरण
- सामान्य और विशिष्ट उद्देश्य, व्यावहारिक उद्देश्य की प्रकृति
- उद्देश्य लिखने की तकनीक – शैक्षणिक एवं व्यावहारिक
- दैनिक जीवन में वाणिज्य का महत्त्व
इकाई 2 : वाणिज्य और पाठ्य पुस्तक का पाठ्यक्रम
- पाठ्यक्रम और पाठ्यचर्या की संकल्पना
- वाणिज्य में पाठ्यक्रम संरचना का सिद्धान्त
- केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, भारतीय माध्यमिक शिक्षा परिषद और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के विद्यालयी पाठ्यक्रम में वाणिज्य विषय का स्थान
- वर्तमान वाणिज्य पाठ्यक्रम की समीक्षात्मक अनुशंसा
- वाणिज्य विषय में पाठ्य पुस्तक और अन्य पूरक वस्तुएँ – महत्त्व एवं गुण
इकाई 3 : विधि और वाणिज्य शिक्षा प्रदान करने की तकनीक
- व्याख्यान विधि
- प्रश्नोत्तर विधि
- वाद-विवाद विधि
- परियोजना विधि
- समस्या-समाधान विधि
- खेल विधि
पाठ्य-पुस्तकें : वाणिज्य शिक्षण — रामपाल सिंह
भौतिक विज्ञान शिक्षण-विधि Teaching Physical Science
इकाई 1 : भौतिक विज्ञान शिक्षण की प्रकृति, अर्थ और महत्त्व
- भौतिक विज्ञान की प्रकृति : शरीर ज्ञान के रूप में, जाँच की विधि, जीवन के प्रति दायित्व और जिम्मेदारी, दूसरे विज्ञान के साथ भौतिक विज्ञान का सम्बन्ध
- भौतिक विज्ञान और आधुनिक भारतीय समाज : समाज पर प्रभाव, पर्यावरण, औद्योगिकीकरण, क्रमबद्ध विकास और शान्ति
- भौतिक विज्ञान शिक्षण का लक्ष्य और उद्देश्य : शैक्षणिक उद्देश्य का ब्लूम वर्गीकरण, शैक्षिक और व्यावहारिक उद्देश्य
इकाई 2 : भौतिक विज्ञान पाठ्यक्रम
- पाठ्यक्रम का अर्थ और उसकी परिभाषा
- पाठ्यक्रम संरचना के सिद्धान्त और उसके चरण
- केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, भारतीय माध्यमिक शिक्षा परिषद और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के विशेष संदर्भ में
- भौतिक विज्ञान पाठ्यक्रम की सीमाओं का बना रहना – माध्यमिक विद्यालय स्तर पर
- विज्ञान में पाठ्यक्रम सुधार : NCF-2005, BCF-2008 के संदर्भ में विज्ञान शिक्षण की आलोचनात्मक अनुशंसा
इकाई 3 : भौतिक विज्ञान शिक्षण का तरीका और विधि/दृष्टिकोण
- भौतिक विज्ञान शिक्षक के गुण एवं क्षमताएँ
- शिक्षण का तरीका – आगमन-निगमन, विश्लेषण-संश्लेषण, ह्यूरिस्टिक, प्रयोगात्मक, समस्या-समाधान विधि, परियोजना, व्याख्यान विधि, प्रदर्शनात्मक, अभिक्रमित शिक्षण, समूह शिक्षण
- भौतिक शिक्षण की तकनीकियाँ – मौखिक, लिखित, सीमुलेशन, ड्रील, आलेख, अनुकरण, टर्म शिक्षण, टास्क एनालाइसिस, प्रयोगशाला तकनीकी और पर्यवेक्षित अध्ययन
- दृष्टिकोण/पहुँच – परिभाषा, निर्माण की समझ, स्पष्ट जानकारी या नियत शर्तें, तर्क के साथ उदाहरण, तुलनात्मक उदाहरण के साथ
पाठ्य-पुस्तकें : भौतिक विज्ञान शिक्षण — जे. के. सूद
जीव विज्ञान शिक्षण-विधि Teaching Biological Science
इकाई 1 : जीव विज्ञान की प्रकृति, क्षेत्र, लक्ष्य और उद्देश्य
- जीव विज्ञान शिक्षा की प्रकृति, क्षेत्र तथा महत्त्व
- जीव विज्ञान शिक्षण के लक्ष्य एवं उद्देश्य – उनके अधिगम परिणामों के रूप में
- जीव विज्ञान शिक्षा का विकास एवं उभरते रूप
- जीव विज्ञान में आविष्कार और जीव विज्ञान क्षेत्र का विकास और भारत में प्रमुख जीव वैज्ञानिकों का योगदान
- वैज्ञानिक विधि के रूप में जीव विज्ञान शिक्षण के वृहत उद्देश्य – एक वैज्ञानिक अभिवृत्ति
इकाई 2 : जीव विज्ञान पाठ्यक्रम
- पाठ्यक्रम का अर्थ और परिभाषा
- जीव विज्ञान में पाठ्यक्रम संरचना का सिद्धान्त तथा पाठ्यक्रम का विकास
- जीव विज्ञान में द्वितीयक माध्यमिक स्तर पर पाठ्यक्रम के उभरते दोष या सीमाएँ
- विज्ञान में पाठ्यक्रम सुधार – विज्ञान शिक्षण संदर्भ में NCF-2005 एवं BCF-2008 की आलोचनात्मक अनुशंसा
- विज्ञान शिक्षण का तरीका – जीव विज्ञान में बालकेन्द्रित पाठ्यक्रम के विकास पर विचार
इकाई 3 : जीव विज्ञान शिक्षण की विधियाँ एवं सहायक सामग्रियाँ
- शिक्षण की विधियाँ – व्याख्यान विधि, प्रदर्शन विधि, व्याख्यान सह प्रदर्शन विधि, खोज विधि (अनुसंधान विधि), प्रयोगशाला विधि, परियोजना विधि, कार्यक्रम अनुदेशन एवं सामूहिक शिक्षण
- जीव विज्ञान शिक्षण में सहायक सामग्री – श्रव्य, दृश्य एवं श्रव्य-दृश्य
- जीव विज्ञान शिक्षण में सामुदायिक संसाधनों का उपयोग
- जीव वैज्ञानिक क्रियाविधि में पाठ्य सहगामी क्रियाओं का संगठन – विज्ञान क्लब, क्षेत्र भ्रमण, विज्ञान मेला, विज्ञान प्रश्नोत्तरी इत्यादि
- जैव वैज्ञानिक स्रोत के केन्द्र का संगठन – जीव विज्ञान प्रयोगशाला और जीव विज्ञान संग्रहालय, मछलीघर का निर्माण और उसकी देखभाल, स्तनधारी और वानस्पतिक बगीचा
पाठ्य-पुस्तकें : जीव विज्ञान का शिक्षण — डी. एन. श्रीवास्तव
गणित शिक्षण-विधि Teaching Mathematics
इकाई 1 : गणित शिक्षण के लक्ष्य और उद्देश्य
- गणित की प्रकृति एवं अर्थ : सिद्धान्त, परिकल्पना, अभिधारणा, (आधारतत्त्व, अभिधारणा), संक्रियाओं आदि की भूमिका
- विद्यालय विषय के रूप में गणित का क्षेत्र और दैनिक जीवन में संक्रिया
- गणित शिक्षण में विकासात्मक तरीका (ढर्रे)
- गणित का अन्य विद्यालयी विषयों के साथ सह-सम्बन्ध
- गणित शिक्षण के लिए सामान्य उद्देश्यों को विकसित करना
- शैक्षणिक एवं व्यावहारिक पदों में गणित शिक्षण को स्थापित करने की जरूरत
- लक्ष्य और उद्देश्य के बीच अन्तर
- शैक्षणिक उद्देश्य
- व्यावहारिक संवर्ग में वर्गीकरण और लेखन शिक्षण का उद्देश्य
इकाई 2 : गणित पाठ्यक्रम और पाठ्य-पुस्तक
- पाठ्यक्रम का अर्थ और परिभाषा
- पाठ्यक्रम संरचना के आधार एवं सिद्धान्त
- विद्यालयी पाठ्यक्रम में गणित का स्थान
- गणित में पाठ्यक्रम सुधार – गणित शिक्षण के सन्दर्भ में NCF-2005 एवं BCF-2008 की सांवेदिक अनुशंसा
- माध्यमिक एवं वरिष्ठ माध्यमिक स्तरों पर गणित पाठ्यक्रम का मूल्यांकन
- गणित में पाठ्य-पुस्तक एवं पूरक सामग्रियाँ
इकाई 3 : गणित शिक्षण के लिए विधियाँ एवं पहुँच
- गणित शिक्षक की दक्षताएँ एवं गुणवत्ताएँ
- शिक्षण की विधियाँ – अधिष्ठापन, विश्लेषण-संश्लेषण, अनुसंधान, प्रायोगिक, समस्या-समाधान, योजना, प्रदर्शन, अभिक्रमित शिक्षण, सामूहिक शिक्षण
- गणित शिक्षण की प्रविधियाँ – मौखिक, लिखित, बहस, आलेख, अनुकरण (नकल), शिक्षण पद, कार्य विश्लेषण, प्रयोगशाला तकनीकियाँ, पर्यवेक्षक अध्ययन
- प्रयास या उपागम – परिभाषा, संरचना की अवधारणा, पर्याप्त अथवा आवश्यक स्थितियों (शर्तों) का अभिकथन, कारण सहित उदाहरण प्रस्तुत करना
- तुलनात्मक एवं विषमात्मक कुछ सटीक उदाहरण प्रस्तुत करना
पाठ्य-पुस्तकें : गणित का शिक्षणशास्त्र — रावत / अग्रवाल
संगणक विज्ञान शिक्षण-विधि Teaching Computer Science
इकाई 1 : संगणक विज्ञान शिक्षण की प्रकृति, क्षेत्र एवं उद्देश्य
- अर्थ एवं संकल्पना
- प्रकृति एवं क्षेत्र
- संगणक विज्ञान की उपयोगिता
- संगणक विज्ञान शिक्षण के उद्देश्य
- लक्ष्य और उद्देश्य के बीच अन्तर
- शैक्षणिक उद्देश्य
- व्यावहारिक संवर्ग में वर्गीकरण और लेखन शिक्षण का उद्देश्य
इकाई 2 : संगणक विज्ञान का विकास तथा इसका पाठ्यक्रम
- संगणक में पहला कदम या संगणक का अस्तित्व
- भारत में संगणक का इतिहास
- भारत में संगणक के महत्त्व और सीमाएँ
- पाठ्यक्रम (अर्थ एवं संकल्पना)
- पाठ्यक्रम रचना का सिद्धान्त
- संगणक विज्ञान के पाठ्यक्रम का विकास
- वैश्वीकरण के युग में विद्यालय पाठ्यक्रम में संगणक का स्थान
इकाई 3 : संगणक विज्ञान में शिक्षण विधि एवं शिक्षण व्यूहरचना
- व्याख्यान विधि
- प्रदर्शन विधि
- प्रयोगात्मक विधि
- ह्यूरिस्टिक विधि
- परियोजना विधि
- आवंटन विधि
- समस्या-समाधान विधि
- संगणक सहायता निर्देश
Course EPC 1
कोर्स ई.पी.सी.–1 : पठन-पाठन पर प्रकाश
Reading and Reflecting on Texts
Credit 2
Theory 40Practicum 10 Full Marks 50
इकाई 1 : कथानात्मक एवं वर्णनात्मक संलग्नता पर प्रकाश
- समझने और आकार देने के लिए पढ़ना (व्यक्तिगत, सामूहिक पठन-पाठन और चर्चा करने के लिए/स्पष्टीकरण के लिए)
- पाठ्यक्रम को पुनः कहना/समझने की समझ – अपने शब्दों में/विभिन्न आयाम में साथ (एक समूह में)
- बयान करना/वर्णन करना (एक छोटे समूह में)
- पात्रों, परिस्थितियों का वर्णन करना – एक छोटे समूह में वर्णन करना
- पाठ्यक्रम पर आलेख तैयार करना; जैसे – दृश्य के छोटे भागों को, कहानी को संप्रेषित करना, परिस्थितियों को संवाद देना (व्यक्तिगत रूप में)
इकाई 2 : सम्मिलित प्रचलित विषय पर आधारित प्रतिपादकीय लेखन
- चयनित पाठ्य पुस्तकें जिनमें जीवनी लेखन या लेख अथवा प्रचलित अथवा अप्रचलित, अकथनीय साहित्य लेखन, सारांश, विषय क्षेत्र से निकाला गया हो – जो छात्राध्यापक द्वारा सम्बन्धित सम्मिलित है (जिसमें विभिन्न विज्ञान, गणित, इतिहास, भूगोल, साहित्य अथवा भाषा के अंश हो सकते हैं)
- सुझावित क्रियाकलाप – निष्कर्ष, सूचना, विषयवस्तु का सार समझने के लिए पढ़ना (विभिन्न खण्डों में पढ़ना एवं एक नोट तैयार करना)
- अवधारणाओं और विचारों को समझना एवं नोट तैयार करना – जैसे फार्म फ्लो छायाचित्र, वृक्षरेख, मन में नक्शा तैयार करना आदि विधियों का उपयोग करना (एक जोड़ा रूप में)
- पाठ/विषय के सार का वर्णन करना (एक व्यापक समूह में)
- लेखन के प्रकार, विषय को दर्शाने के लिए विशेष शब्दों का उपयोग और विशेष परिप्रेक्ष्य या संदर्भों के उपयोग को समझना एवं उसका समझाना (वाद-विवाद की शैली के साथ)
- पाठ्य पुस्तकों का सारांश अथवा उनके लेखन का पुनरावलोकन कर मतों और समीक्षा के साथ रिपोर्ट तैयार करना (व्यक्तिगत कार्य)
इकाई 3 : शैक्षणिक लेखन में समाविष्ट
- यह विषय किसी एक लेखक का शैक्षणिक आलेख, कहानी, निबंध अथवा एक खास सार हो सकता है, जिसमें शिक्षा, विद्यालय, शिक्षण या अधिगम पर चर्चा की गई हो
- सुझावित क्रियाकलाप – निबन्ध के कथन और थीम को समझने के लिए पढ़ना (व्यक्तिगत रूप में या युग्म में अध्ययन निर्देशित)
- तर्क की संरचना का विश्लेषण – मुख्य विचार को समझना, अनुच्छेद के विषय वाक्य को समझना, सहायक विचार और उदाहरण को समझना, उतार-चढ़ाव के पदों को समझना (छोटे युग्मों में वाद-विवाद निर्देशित)
- विषय वस्तु, प्रतिक्रियाओं एवं विभिन्न बिन्दु पर विचार करना (छोटे युग्मों में वाद-विवाद)
- प्रतिक्रियाओं को कागज पर लिखना (व्यक्तिगत या युग्म में)
- चयनित प्रश्नों, प्रश्नोत्तर, प्रश्नपत्रों का प्रस्तुतीकरण (वृहत् समूहों)
पाठ्य-पुस्तकें : विभिन्न साहित्यों का पठन एवं निष्कर्षण — पायल भोला जैन
Course EPC 2
ई.पी.सी.–2 : शिक्षा में नाट्य एवं कला
Drama and Art in Education
Credit 2
Theory 40Practicum 10 Full Marks 50
इकाई 1 : प्रदर्शन कला के रूप में नाटक एवं शिक्षा में इसकी प्रासंगिकता
- नाटक की अवधारणा एवं शिक्षा में इसकी प्रासंगिकता की समझ
- शिक्षणशास्त्र के रूप में नाटक/अभिनय
- नाटक का आयोजन – शुरुआती गतिविधियाँ एवं संसाधन, नाटक से संबंधित मंडली
- नाटक प्रस्तुति : कहानी, संवाद, पात्र, संकेत, अलग-अलग स्थिति का निर्माण
- नाटक के अन्य रूप : मंच प्रदर्शन, प्रहसन, नकल करना, नुक्कड़ नाटक मंचन
- भारतीय और क्षेत्रीय नाटक परंपराओं का ज्ञान
- समकालीन भारतीय स्थिति में नृत्य एवं नाटक की सामाजिक प्रासंगिकता
- अध्येता में नाट्य कला की अनुशंसा
इकाई 2 : दृश्य एवं शिल्प कला
- दृश्य कला एवं शिल्प का साथ शिक्षा में उनकी प्रासंगिकता की समझ
- शिक्षण शास्त्र के रूप में दृश्य कला एवं शिल्प
- दृश्य कला एवं शिल्प : विभिन्न रूप, आधारभूत स्रोत और उनके उपयोग
- भारतीय शिल्प परंपरा और क्षेत्रीय लोक कला का ज्ञान
- अधिगमकर्ता में दृश्य कला और शिल्प की अनुशंसा
इकाई 3 : कला समन्वित प्राप्त अधिगम और शिक्षक की भूमिका
- विद्यालय पाठ्यक्रम के साथ नाटक का एकत्रीकरण एवं जुड़ाव
- नृत्य/नाटक अनुसंधान और सह संबंधित क्रियाओं की कला से सह संबद्धता
- विद्यालयीय पाठ्यचर्या में कला एवं शिल्प का जुड़ाव
- कला समन्वित अधिगम के लिए शिक्षक की तैयारी
- नृत्य/नाटक में प्रसार एवं अध्ययन में मीडिया तथा प्रौद्योगिकी की भूमिका
पाठ्य-पुस्तकें : नाट्य कला और शिक्षा — रीता चौहान
Course EPC 3
ई.पी.सी.–3 : आई.सी.टी. की आलोचनात्मक समझ
Critical Understanding of ICT
Credit 2
Theory 40Practicum 10 Full Marks 50
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इकाई 3 : आई.सी.टी. आधारित शिक्षा एवं मूल्यांकन
- संगणक आधारित अनुदेश, संगणक सहायक अनुदेश और संगणक प्रबंधित अनुदेश
- शैक्षिक सॉफ्टवेयर अवधारणा, शैक्षिक सॉफ्टवेयर की जरूरत एवं मूल्यांकन
- प्रौद्योगिकी सहायता प्रस्तुति/प्रयोजना कार्य/दत्त कार्य : अवधारणा, विद्यार्थियों के शैक्षिक मल्टीमीडिया प्रस्तुति (डड)/परियोजना/दत्त कार्य की जरूरत एवं मूल्यांकन
- साहित्यिक चोरी : प्रौद्योगिकी समर्थित विद्यार्थियों के दत्त कार्य/परियोजना कार्य के संबंध में साहित्यिक चोरी की अवधारणा, साथ ही शिक्षा में साहित्यिक चोरी को कम करने के उपाय
- विद्यालय स्थिति में प्रश्न बैंक का विकास करना (मूल्यांकन प्रक्रिया सन्निहित) : हॉट पोटैटोज़ का उपयोग करते हुए विविध प्रकार के प्रश्न – बहुविकल्पी प्रश्न, लघु उत्तरीय, उलझे वाक्य के रूप में प्रश्न, क्रॉसवर्ड, मिलान करने वाले प्रश्न, रिक्त स्थान पूर्ति वाले अभ्यास प्रश्नों से प्रश्न बैंक का विकास करना
पाठ्य-पुस्तकें : कम्प्यूटर एवं संचार तकनीकी — स्मिता श्रीवास्तव
Second Year – Scheme of Marks
Engagement with the Field: Tasks and Assignments for Courses 1–6 & 7A.
Course 7B
विद्यालयी विषय का शिक्षणशास्त्र – भाग II
Pedagogy of a School Subject – Part II
Credit 2
Theory 40Practicum 10 Full Marks 50
छात्राध्यापक अपने दोनों शिक्षण विषयों के लिए भाग II का अध्ययन करेंगे।
अंग्रेज़ी शिक्षण-विधि (भाग II) Teaching English – Part II
इकाई 1 : शिक्षण की योजना
- पाठ योजना का अर्थ एवं महत्त्व, पाठ योजना के चरण – बी.एस. ब्लूम मॉडल
- शिक्षण कौशल : मूल शिक्षण कौशल एवं सूक्ष्म पाठों की योजना
- गद्य शिक्षण : गद्य पाठ की योजना के मुख्य चरण
- पद्य शिक्षण : कविता पाठ के उद्देश्य एवं पद्य पाठ की योजना के मुख्य चरण
- व्याकरण शिक्षण : अंग्रेज़ी शिक्षण में व्याकरण का स्थान, व्याकरण शिक्षण की विधियाँ एवं उसकी योजना
इकाई 2 : शिक्षण सहायक सामग्री
- शिक्षण सहायक सामग्री का अर्थ एवं महत्त्व
- सरल सहायक सामग्री : श्यामपट्ट, चित्र, चार्ट, मॉडल, मानचित्र, फ्लैश कार्ड, कठपुतली आदि
- तकनीकी सहायक सामग्री : रेडियो, टेप रिकॉर्डर, टेलीविज़न, वीडियो, ओ.एच.पी., एल.सी.डी., लिंग्वाफोन आदि
- कम्प्यूटर सहायतित भाषा अधिगम
- अंग्रेज़ी शिक्षण में भाषा प्रयोगशाला का महत्त्व
- अंग्रेज़ी शिक्षण सहायक सामग्री में नवाचार
- अंग्रेज़ी पुस्तकालय, अंग्रेज़ी कक्षा
इकाई 3 : मूल्यांकन तकनीकें
- मूल्यांकन की अवधारणा एवं प्रकार
- अच्छे परीक्षण की विशेषताएँ
- निबन्धात्मक, लघु उत्तरीय एवं वस्तुनिष्ठ प्रश्नों सहित उपलब्धि परीक्षण का निर्माण
- पठन, लेखन, वाचन (बोलना), व्याकरण एवं शब्दावली की जाँच के तरीके
- भाषा शिक्षक के गुण : एक मूल्यांकनात्मक दृष्टिकोण
पाठ्य-पुस्तकें : New Trends in Teaching of English — हेना सिद्दीकी
हिन्दी शिक्षण-विधि (भाग II) Teaching Hindi – Part II
इकाई 1 : शिक्षण की योजना
- हिन्दी भाषा शिक्षण के सामान्य सिद्धान्त (मातृभाषा एवं राष्ट्रभाषा के विशेष संदर्भ में)
- पाठ योजना का अर्थ एवं महत्त्व, पाठ योजना के चरण – बी.एस. ब्लूम मॉडल
- शिक्षण कौशल : मूल शिक्षण कौशल एवं उनके विकास हेतु सूक्ष्म पाठों की योजना
- भाषा के मूल कौशल
- बहुभाषी कक्षा में हिन्दी शिक्षण की विधियाँ
इकाई 2 : शिक्षण सहायक सामग्री
- शिक्षण सहायक सामग्री का अर्थ एवं महत्त्व
- सरल सहायक सामग्री : श्यामपट्ट, चित्र, चार्ट, मानचित्र, मॉडल, फ्लैश कार्ड, कठपुतली, चुम्बकीय पट्ट आदि
- तकनीकी सहायक सामग्री : रेडियो, टेप रिकॉर्डर, टेलीविज़न, वीडियो, ओ.एच.पी., एल.सी.डी. प्रोजेक्टर, ग्रामोफोन, लिंग्वाफोन
- कम्प्यूटर सहायतित भाषा अधिगम
- भाषा प्रयोगशाला एवं उसका महत्त्व
- अच्छी पाठ्यपुस्तक की प्रमुख विशेषताएँ
- हिन्दी की अच्छी पाठ्यपुस्तक की विशेषताएँ
इकाई 3 : मूल्यांकन तकनीकें
- मूल्यांकन की अवधारणा एवं प्रकार
- अच्छे परीक्षण की विशेषताएँ
- निबन्धात्मक, लघु उत्तरीय एवं वस्तुनिष्ठ प्रश्नों सहित उपलब्धि परीक्षण का निर्माण
- पठन, लेखन, वाचन (बोलना), व्याकरण एवं शब्दावली की जाँच के तरीके
- भाषा शिक्षक के गुण : एक मूल्यांकनात्मक दृष्टिकोण
- हिन्दी शिक्षक के गुण
पाठ्य-पुस्तकें : हिन्दी शिक्षण — रामशक्ल पाण्डेय
संस्कृत शिक्षण-विधि (भाग II) Teaching Sanskrit – Part II
इकाई 1 : शिक्षण की योजना
- संस्कृत शिक्षण की अनुवाद विधि : लाभ एवं सीमाएँ
- प्रत्यक्ष विधि : मुख्य सिद्धान्त एवं तकनीकें
- अन्य विधियाँ : पारम्परिक विधि, पाठ्यपुस्तक विधि, चयनात्मक विधि, संप्रेषणात्मक उपागम, आगमनात्मक एवं निगमनात्मक विधि
- पाठ योजना का अर्थ एवं महत्त्व, चरण – बी.एस. ब्लूम मॉडल
- शिक्षण कौशल : मूल कौशल एवं सूक्ष्म पाठों की योजना
- भाषा के मूल कौशल
इकाई 2 : शिक्षण सहायक सामग्री
- शिक्षण सहायक सामग्री का अर्थ एवं महत्त्व
- सरल सहायक सामग्री : श्यामपट्ट, चित्र, चार्ट, मानचित्र, मॉडल, फ्लैश कार्ड, कठपुतली, चुम्बकीय पट्ट आदि
- तकनीकी सहायक सामग्री : रेडियो, टेप रिकॉर्डर, टेलीविज़न, वीडियो, ओ.एच.पी., एल.सी.डी. प्रोजेक्टर, ग्रामोफोन, लिंग्वाफोन
- कम्प्यूटर सहायतित भाषा अधिगम
- भाषा प्रयोगशाला एवं उसका महत्त्व
- अच्छी पाठ्यपुस्तक की प्रमुख विशेषताएँ
इकाई 3 : मूल्यांकन तकनीकें
- मूल्यांकन की अवधारणा एवं प्रकार
- अच्छे परीक्षण की विशेषताएँ
- निबन्धात्मक, लघु उत्तरीय एवं वस्तुनिष्ठ प्रश्नों सहित उपलब्धि परीक्षण का निर्माण
- पठन, लेखन, वाचन (बोलना), व्याकरण एवं शब्दावली की जाँच के तरीके
- भाषा शिक्षक के गुण : एक मूल्यांकनात्मक दृष्टिकोण
- संस्कृत शिक्षक के गुण
पाठ्य-पुस्तकें : संस्कृत शिक्षण — शिखा शर्मा
उर्दू शिक्षण-विधि (भाग II) Teaching Urdu – Part II
इकाई 1 : शिक्षण की योजना
- उर्दू भाषा शिक्षण के सामान्य सिद्धान्त (मातृभाषा के विशेष संदर्भ में)
- पाठ योजना का अर्थ एवं महत्त्व, चरण – बी.एस. ब्लूम मॉडल
- शिक्षण कौशल : मूल कौशल एवं सूक्ष्म पाठों की योजना
- भाषा के मूल कौशल
- गैर-उर्दू भाषियों के लिए उर्दू शिक्षण की विधियाँ
इकाई 2 : शिक्षण सहायक सामग्री
- शिक्षण सहायक सामग्री का अर्थ एवं महत्त्व
- सरल सहायक सामग्री : श्यामपट्ट, चित्र, चार्ट, मानचित्र, मॉडल, फ्लैश कार्ड, कठपुतली, चुम्बकीय पट्ट आदि
- तकनीकी सहायक सामग्री : रेडियो, टेप रिकॉर्डर, टेलीविज़न, वीडियो, ओ.एच.पी., एल.सी.डी. प्रोजेक्टर, ग्रामोफोन, लिंग्वाफोन
- कम्प्यूटर सहायतित भाषा अधिगम
- भाषा प्रयोगशाला एवं उसका महत्त्व
- अच्छी पाठ्यपुस्तक की प्रमुख विशेषताएँ
- उर्दू की अच्छी पाठ्यपुस्तक की विशेषताएँ
- उर्दू में सहपाठ्यक्रम क्रियाएँ : खुशनवीसी, मुशायरा, बैतबाज़ी, बज़्म-ए-अदब, मुबाहिसा, अदबी नुमाइश, अदबी मक़ाला, मोहल्ला व मोरक़्क़ा
इकाई 3 : मूल्यांकन तकनीकें
- मूल्यांकन की अवधारणा एवं प्रकार
- अच्छे परीक्षण की विशेषताएँ
- निबन्धात्मक, लघु उत्तरीय एवं वस्तुनिष्ठ प्रश्नों सहित उपलब्धि परीक्षण का निर्माण
- पठन, लेखन, वाचन (बोलना), व्याकरण एवं शब्दावली की जाँच के तरीके
- भाषा शिक्षक के गुण : एक मूल्यांकनात्मक दृष्टिकोण
- उर्दू शिक्षक के गुण
पाठ्य-पुस्तकें : उर्दू शिक्षण — एम. ए. मक्की
इतिहास शिक्षण-विधि (भाग II) Teaching History – Part II
इकाई 1 : इतिहास शिक्षण में सहायक सामग्री एवं क्रियाकलाप
- शिक्षण अधिगम सामग्री, सन्दर्भ सामग्री – अभिलेखागार, पुरातात्त्विक सर्वेक्षण रिपोर्ट, समाचार पत्र एवं पत्रिकाएँ आदि
- शिक्षण सहायक एवं दृश्य-श्रव्य सामग्री का चयन एवं उपयोग – ऐतिहासिक मानचित्र, पोस्टर, कार्टून, लेख, पुस्तकें, प्राचीन संग्रह, सामुदायिक संसाधन
- सहपाठ्यक्रम क्रियाओं का आयोजन – इतिहास क्लब, अध्ययन वृत्त, वाद-विवाद, प्रदर्शनी, संगोष्ठी एवं चर्चा, स्क्रैप बुक तैयार करना, इतिहास संग्रहालय
- इतिहास शिक्षण में भ्रमण एवं यात्रा की भूमिका
इकाई 2 : अनुदेशनात्मक योजना
- इकाई योजना : आवश्यकता एवं चरण
- मूल शिक्षण कौशल एवं उनके विकास हेतु सूक्ष्म शिक्षण पाठ की योजना
- पाठ योजना : प्रभावी योजना की प्रक्रिया
- विषयवस्तु का चयन एवं संगठन, अनुदेशनात्मक एवं व्यवहारगत उद्देश्य, शिक्षण सहायक सामग्री का निर्माण व प्रयोग, छात्र-प्रतिक्रिया का प्रबन्धन
इकाई 3 : इतिहास में मूल्यांकन
- मूल्यांकन की अवधारणा एवं उद्देश्य
- मूल्यांकन के प्रकार : रचनात्मक बनाम संकलनात्मक, बाह्य बनाम आन्तरिक, मानदण्ड-संदर्भित बनाम मापदण्ड-संदर्भित
- मूल्यांकन के उपकरण
- अच्छे मूल्यांकन उपकरण के गुण
- निबन्धात्मक एवं वस्तुनिष्ठ परीक्षण : गुण एवं सीमाएँ
- उपलब्धि परीक्षण का निर्माण
- इतिहास में उपलब्धि परीक्षण का निर्माण
पाठ्य-पुस्तकें : इतिहास शिक्षण — गुरसरनदास त्यागी
नागरिक शास्त्र शिक्षण-विधि (भाग II) Teaching Civics – Part II
इकाई 1 : नागरिकशास्त्र शिक्षण में सहायक सामग्री एवं क्रियाकलाप
- शिक्षण सहायक सामग्री का महत्त्व, सहायक सामग्री के विभिन्न प्रकार
- सहायक सामग्री के प्रभावी उपयोग में नागरिकशास्त्र शिक्षक की भूमिका
- नागरिकशास्त्र शिक्षण में सहपाठ्य क्रियाओं की भूमिका
- सहपाठ्य क्रियाओं का आयोजन : वाद-विवाद, संगोष्ठी, सम्मेलन, पैनल चर्चा, संवाद एवं सिम्पोज़ियम, नागरिकशास्त्र क्लब
- कम लागत की सामग्री के विकास में सामुदायिक संसाधनों का उपयोग
इकाई 2 : अनुदेशनात्मक योजना
- इकाई योजना : आवश्यकता एवं चरण
- मूल शिक्षण कौशल एवं उनके विकास हेतु सूक्ष्म शिक्षण पाठ की योजना
- पाठ योजना : प्रभावी योजना की प्रक्रिया
- विषयवस्तु का चयन एवं संगठन, अनुदेशनात्मक एवं व्यवहारगत उद्देश्य, शिक्षण सहायक सामग्री का निर्माण व प्रयोग, छात्र-प्रतिक्रिया का प्रबन्धन
इकाई 3 : नागरिकशास्त्र में मूल्यांकन
- मूल्यांकन की अवधारणा एवं उद्देश्य
- मूल्यांकन के प्रकार : रचनात्मक बनाम संकलनात्मक, बाह्य बनाम आन्तरिक, मानदण्ड-संदर्भित बनाम मापदण्ड-संदर्भित
- मूल्यांकन के उपकरण
- अच्छे मूल्यांकन उपकरण के गुण
- निबन्धात्मक एवं वस्तुनिष्ठ परीक्षण : गुण एवं सीमाएँ
- उपलब्धि परीक्षण का निर्माण
- नागरिकशास्त्र में उपलब्धि परीक्षण का निर्माण
पाठ्य-पुस्तकें : नागरिकशास्त्र शिक्षण का प्रणाली विज्ञान — गुरसरनदास त्यागी
भूगोल शिक्षण-विधि (भाग II) Teaching Geography – Part II
इकाई 1 : शिक्षण सहायक सामग्री एवं सहपाठ्य क्रियाएँ
- भूगोल शिक्षक : आवश्यकताएँ एवं गुण
- शिक्षण सहायक सामग्री
- जन-संचार माध्यम
- भूगोल कक्ष, प्रयोगशाला, भूगोल संग्रहालय – महत्त्व, डिज़ाइन, सुसज्जित करना, रखरखाव
- क्षेत्र भ्रमण, यात्राएँ एवं शैक्षिक भ्रमण का महत्त्व एवं संगठन
- भूगोल आधारित शौक, क्लब आदि
इकाई 2 : अनुदेशनात्मक योजना
- इकाई योजना : अर्थ, आवश्यकता एवं चरण
- वर्ष भर के कार्य की योजना बनाना
- सूक्ष्म शिक्षण
- पाठ योजना : अर्थ, महत्त्व, प्रारूप, अच्छी पाठ योजना की विशेषताएँ
- भूगोल में प्रायोगिक कार्य की योजना
इकाई 3 : भूगोल में मूल्यांकन
- भूगोल में मूल्यांकन का उद्देश्य एवं महत्त्व
- रचनात्मक एवं संकलनात्मक मूल्यांकन
- इकाई परीक्षण : अर्थ एवं महत्त्व
- भूगोल में उपलब्धि परीक्षण की तैयारी
- भूगोल में सुसंतुलित प्रश्न-पत्र
- खुली पुस्तक परीक्षा, परियोजना कार्य का मूल्यांकन, प्रश्न बैंक
- निदानात्मक परीक्षण एवं उपचारात्मक शिक्षण
पाठ्य-पुस्तकें : भूगोल शिक्षण — एच. एस. सिंह
अर्थशास्त्र शिक्षण-विधि (भाग II) Teaching Economics – Part II
इकाई 1 : शिक्षण सहायक सामग्री एवं सहपाठ्य क्रियाएँ
- शिक्षण सहायक सामग्री का महत्त्व, विभिन्न प्रकार एवं अर्थशास्त्र शिक्षण में उनका प्रभावी उपयोग
- अर्थशास्त्र शिक्षण में सहपाठ्य क्रियाओं की भूमिका
- सहपाठ्य क्रियाओं का आयोजन : वाद-विवाद, संगोष्ठी, सम्मेलन, पैनल चर्चा, सिम्पोज़ियम, अर्थशास्त्र क्लब, दीवार पत्रिका, पत्रिका, प्रश्नोत्तरी
- इन सहायक सामग्रियों के उपयोग एवं विकास में अर्थशास्त्र शिक्षक की भूमिका
- सामुदायिक संसाधनों का उपयोग
इकाई 2 : अनुदेशनात्मक योजना
- इकाई योजना : अर्थ, आवश्यकता एवं चरण
- मूल शिक्षण कौशल
- सूक्ष्म योजना का विकास
- पाठ योजना : पाठ योजना तैयार करने की प्रक्रिया
इकाई 3 : अर्थशास्त्र में मूल्यांकन
- शैक्षिक मूल्यांकन की प्रकृति, आवश्यकता एवं शैक्षिक प्रक्रिया में भूमिका
- अधिगमकर्ता के प्रदर्शन के आकलन की मूल्यांकन प्रक्रिया, मूल्यांकन के उपयोग
- अर्थशास्त्र में शैक्षणिक उद्देश्यों के परीक्षण का व्यवहारगत उपागम
- इकाई परीक्षण एवं उपलब्धि परीक्षण की योजना व तैयारी
पाठ्य-पुस्तकें : अर्थशास्त्र शिक्षण का प्रणाली विज्ञान — गुरसरनदास त्यागी
गृह विज्ञान शिक्षण-विधि (भाग II) Teaching Home Science – Part II
इकाई 1 : गृह विज्ञान शिक्षण की अनुदेशनात्मक रणनीतियाँ
- गृह विज्ञान शिक्षण की विधियाँ : व्याख्यान-सह-चर्चा, प्रदर्शन, परियोजना, समस्या-समाधान, प्रयोगशाला, दल शिक्षण, गृहकार्य, गृह अनुभव (क्रियाकलाप) विधि
- शिक्षण कौशल एवं उनका विकास – सूक्ष्म शिक्षण एवं अनुकरण द्वारा मूल शिक्षण कौशलों का विकास
- पाठ योजना : प्रभावी पाठ योजना बनाने की प्रक्रिया
- पाठ योजना में सैद्धान्तिक एवं प्रायोगिक पक्ष का संतुलन
इकाई 2 : गृह विज्ञान शिक्षण की समस्याएँ
- विद्यालयों में गृह विज्ञान शिक्षण की समस्याएँ
- लैंगिक भेदभाव के साथ शिक्षण
- ऐच्छिक विषय के रूप में शिक्षण
- प्रायोगिक पक्ष के बिना शिक्षण
- बाद की अवस्था में शिक्षण
इकाई 3 : गृह विज्ञान में मूल्यांकन
- मूल्यांकन की अवधारणा एवं उद्देश्य
- मूल्यांकन के प्रकार : रचनात्मक-संकलनात्मक, बाह्य-आन्तरिक
- मूल्यांकन के उपकरण
- अच्छे मूल्यांकन उपकरण के गुण
- निबन्धात्मक एवं वस्तुनिष्ठ परीक्षण
- उपलब्धि परीक्षण की योजना एवं निर्माण
- अधिगमकर्ता के प्रायोगिक ज्ञान के मूल्यांकन हेतु उपयुक्त उपकरण का चयन
पाठ्य-पुस्तकें : गृह विज्ञान शिक्षण — डी. एन. श्रीवास्तव / जी. पी. शैरी
वाणिज्य शिक्षण-विधि (भाग II) Teaching Commerce – Part II
इकाई 1 : अनुदेशनात्मक सामग्री – शिक्षण सहायक सामग्री एवं सहपाठ्य क्रियाएँ
- वाणिज्य शिक्षण में शिक्षण सहायक सामग्री का अर्थ, महत्त्व एवं उपयोग
- अनुदेशनात्मक सामग्री एवं उपकरण के चयन के मापदंड
- वाणिज्य शिक्षा में प्रयुक्त विभिन्न दृश्य-श्रव्य उपकरण एवं सामग्री
- वाणिज्य शिक्षा को सुदृढ़ करने हेतु विभिन्न सहपाठ्य क्रियाएँ
- वाणिज्य शिक्षण में सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर का प्रयोग
- वाणिज्य में प्रायोगिक कार्य
इकाई 2 : वाणिज्य शिक्षण की योजना
- इकाई योजना एवं पाठ योजना
- मूल शिक्षण कौशलों के विकास हेतु सूक्ष्म योजना
- पाठ योजना की प्रक्रिया : विषयवस्तु का चयन एवं संगठन, वाणिज्य में अनुदेश की योजना, अनुदेशनात्मक एवं व्यवहारगत उद्देश्य, शिक्षण सहायक सामग्री की तैयारी व उपयोग, छात्र-प्रतिक्रिया का प्रबन्धन
- वाणिज्य में वर्ष भर के कार्य की योजना : लेखाकरण एवं बजट
इकाई 3 : वाणिज्य में मूल्यांकन
- मूल्यांकन की अवधारणा
- मापन एवं परीक्षण
- परीक्षणों के प्रकार
- वाणिज्य में निदानात्मक परीक्षण सहित विविध परीक्षणों का विकास
- उपचारात्मक शिक्षण
- उपलब्धि परीक्षण की तैयारी एवं परीक्षण प्रश्नों के प्रकार
पाठ्य-पुस्तकें : वाणिज्य शिक्षण — रामपाल सिंह
भौतिक विज्ञान शिक्षण-विधि (भाग II) Teaching Physical Science – Part II
इकाई 1 : भौतिक विज्ञान में शिक्षण सहायक सामग्री एवं क्रियाकलाप
- श्रव्य, दृश्य, श्रव्य-दृश्य, स्थिर, गतिशील, द्विआयामी, त्रिआयामी शिक्षण सहायक सामग्री
- कम लागत की तात्कालिक शिक्षण सहायक सामग्री बनाना
- भौतिक विज्ञान प्रयोगशाला : सामग्री की व्यवस्था एवं महत्त्व
- भौतिक विज्ञान शिक्षण में सामुदायिक संसाधनों का उपयोग
- अनौपचारिक उपागम : विज्ञान क्लब, क्षेत्र भ्रमण, विज्ञान मेला, विज्ञान प्रश्नोत्तरी
इकाई 2 : भौतिक विज्ञान में अनुदेशनात्मक रणनीतियाँ
- इकाई योजना : आवश्यकता एवं चरण
- मूल शिक्षण कौशल एवं उनके विकास हेतु सूक्ष्म शिक्षण पाठ की योजना
- पाठ योजना : प्रभावी योजना की प्रक्रिया
- विषयवस्तु का चयन एवं संगठन, अनुदेशनात्मक एवं व्यवहारगत उद्देश्य, शिक्षण सहायक सामग्री का निर्माण व प्रयोग, छात्र-प्रतिक्रिया का प्रबन्धन
इकाई 3 : भौतिक विज्ञान में मूल्यांकन
- मूल्यांकन की अवधारणा एवं उद्देश्य
- मूल्यांकन के प्रकार : रचनात्मक बनाम संकलनात्मक, बाह्य बनाम आन्तरिक, मानदण्ड-संदर्भित बनाम मापदण्ड-संदर्भित
- मूल्यांकन के उपकरण
- अच्छे मूल्यांकन उपकरण के गुण
- निबन्धात्मक एवं वस्तुनिष्ठ परीक्षण : गुण एवं सीमाएँ
- उपलब्धि परीक्षण का निर्माण
- शिक्षक निर्मित एवं मानकीकृत परीक्षण
- उपलब्धि परीक्षण की योजना एवं निर्माण
पाठ्य-पुस्तकें : भौतिक विज्ञान शिक्षण — जे. के. सूद
जीव विज्ञान शिक्षण-विधि (भाग II) Teaching Biological Science – Part II
इकाई 1 : जीव विज्ञान शिक्षण में संचरणात्मक (ट्रांज़ेक्शनल) रणनीतियाँ
- इकाई योजना : महत्त्व एवं तैयारी
- पाठ योजना : आवश्यकता एवं महत्त्व
- विषयवस्तु का चयन एवं संगठन; जीव विज्ञान में अनुदेश की योजना, अनुदेशनात्मक एवं व्यवहारगत उद्देश्य, शिक्षण सहायक सामग्री की तैयारी व उपयोग, छात्र-प्रतिक्रिया का प्रबन्धन
- मूल शिक्षण कौशल एवं उनके विकास हेतु सूक्ष्म पाठों की योजना
- किसी दिए गए प्रकरण में विषयवस्तु विश्लेषण एवं प्रमुख संप्रत्ययों की पहचान
इकाई 2 : निम्नलिखित प्रकरणों का शैक्षणिक विश्लेषण
- कोशिका के अंगकों की संरचना एवं कार्य, पादपों एवं जन्तुओं में पोषण, प्रकाश-संश्लेषण, श्वसन, पादपों में परिवहन तंत्र एवं जन्तुओं में रक्त परिसंचरण तंत्र, मनुष्य में उत्सर्जन तंत्र, पादपों एवं जन्तुओं में जनन, पादप हार्मोन तथा पारिस्थितिक संतुलन
- शैक्षणिक विश्लेषण में सम्मिलित हों : संप्रत्ययों की पहचान
- व्यवहारगत परिणामों की सूची बनाना
- मूल्यांकन प्रक्रिया की सूची बनाना
- क्रियाकलापों एवं प्रयोगों की सूची बनाना
इकाई 3 : जीव विज्ञान में मूल्यांकन
- मूल्यांकन की अवधारणा एवं उद्देश्य
- मूल्यांकन के प्रकार : रचनात्मक बनाम संकलनात्मक, बाह्य बनाम आन्तरिक, मानदण्ड-संदर्भित बनाम मापदण्ड-संदर्भित
- मूल्यांकन के उपकरण
- अच्छे मूल्यांकन उपकरण के गुण
- निबन्धात्मक एवं वस्तुनिष्ठ परीक्षण : गुण एवं सीमाएँ
- उपलब्धि परीक्षण का निर्माण
- निबन्धात्मक व वस्तुनिष्ठ परीक्षण के सुधार हेतु उपाय
पाठ्य-पुस्तकें : जीव विज्ञान का शिक्षण — डी. एन. श्रीवास्तव
गणित शिक्षण-विधि (भाग II) Teaching Mathematics – Part II
इकाई 1 : गणित में शिक्षण सहायक सामग्री एवं क्रियाकलाप
- श्रव्य, दृश्य, श्रव्य-दृश्य, स्थिर, गतिशील, द्विआयामी, त्रिआयामी शिक्षण सहायक सामग्री
- कम लागत की तात्कालिक शिक्षण सहायक सामग्री बनाना
- मनोरंजन के लिए खेल के रूप में गणित : प्रश्नोत्तरी, मेला, पहेलियाँ, बुझौवल, जादुई वर्ग
- गणित में निदानात्मक एवं संवर्धन कार्यक्रम
- गणित प्रयोगशाला एवं गणित क्लब
इकाई 2 : गणित शिक्षण की योजना
- इकाई योजना एवं पाठ योजना
- सूक्ष्म योजना
- पाठ योजना की प्रक्रिया : विषयवस्तु का चयन एवं संगठन, गणित में अनुदेश की योजना, अनुदेशनात्मक एवं व्यवहारगत उद्देश्य, शिक्षण सहायक सामग्री की तैयारी व उपयोग, छात्र-प्रतिक्रिया का प्रबन्धन
इकाई 3 : गणित में मूल्यांकन
- मूल्यांकन का अर्थ एवं उद्देश्य
- मूल्यांकन के प्रकार : रचनात्मक-संकलनात्मक, बाह्य-आन्तरिक, मानदण्ड-संदर्भित, मापदण्ड-संदर्भित
- मूल्यांकन के उपकरण
- अच्छे मापन उपकरण के गुण
- निबन्धात्मक एवं वस्तुनिष्ठ परीक्षण, शिक्षक निर्मित एवं मानकीकृत परीक्षण
- उपलब्धि परीक्षण की योजना एवं निर्माण
पाठ्य-पुस्तकें : गणित का शिक्षणशास्त्र — रावत / अग्रवाल
संगणक विज्ञान शिक्षण-विधि (भाग II) Teaching Computer Science – Part II
इकाई 1 : पाठ योजना एवं संगणक में अनुदेश
- सूक्ष्म योजना
- पाठ योजना के चरण
- संगणक विज्ञान में पाठ्यपुस्तक
- संगणक विज्ञान का प्रभावी शिक्षक
- संगणक विज्ञान में शिक्षण सहायक सामग्री
- संगणक विज्ञान शिक्षण की समस्याएँ
इकाई 2 : संगणक विज्ञान में मूल्यांकन
- मूल्यांकन की प्रकृति एवं आवश्यकता
- मूल्यांकन के उद्देश्य एवं प्रकार : आन्तरिक-बाह्य, मानदण्ड-संदर्भित, रचनात्मक-संकलनात्मक
- संगणक के माध्यम से मूल्यांकन
- परीक्षण निर्माण
- मूल्यांकन के उपकरण : अच्छे मापन उपकरण की विशेषताएँ
इकाई 3 : संगणक विज्ञान प्रयोगशाला
- प्रयोगशाला की आवश्यकता एवं महत्त्व
- प्रयोगशाला की योजना एवं डिज़ाइन
- उपकरण एवं सामग्री
- रखरखाव एवं सुरक्षा के उपाय
- संगणक विज्ञान शिक्षण में प्रायोगिक कार्य
- शिक्षा में इंटरनेट एवं इंट्रानेट
Course 8
ज्ञान एवं पाठ्यक्रम
Knowledge and Curriculum
Credit 4
Theory 80Practicum 20 Full Marks 100
इकाई 1 : ज्ञान और जानकारी
- ज्ञान की संकल्पना : ज्ञान क्या है?
- जानकारी क्या है? कर सकना, सोचना और जानकारी में अलग पहचान महसूस करना
- सूचना, ज्ञान, कौशल, विश्वास और सच्चाई के बीच अन्तर
- जानकारी प्रक्रिया
- जानकारी के अलग तरीके क्या हैं? जानकारी का निर्माण कैसे होता है? जानकारी के बनावट में क्या मौजूद है?
- जानकार से सम्बन्धित भूमिका और ज्ञान आदान-प्रदान में जानना और बनावट क्या है?
- जानकारी के पक्ष : स्थानीय और सार्वभौमिक, ठोस और संक्षेपिक, सैद्धान्तिक और प्रायोगिक, प्रकरण संबंध और मूल पाठ – विषयक, विद्यालय और विद्यालय के बाहर (विद्यालय ज्ञान के खास दृष्टिकोण की समझ पर बल)
- जानकारी में संस्कृति की भूमिका क्या है?
- जानकारी क्रियाविधि में कैसे प्रस्तुत किया गया है? ज्ञान पर कैसे इसका प्रभाव पड़ता है?
इकाई 2 : ज्ञान के रूप में विद्यालयों में इसके संगठन
- क्या हम लोग ज्ञान को वर्गीकृत कर सकते हैं, किस आधार पर?
- विद्यालयी शिक्षा में ज्ञान के किस रूप को जोड़ा जाता है?
- कौन चुनता है, वैध करता है, और विद्यालय में संगठित ज्ञान के वर्गीकरण का रूप?
- पाठ्यक्रम के रूप में, पाठ्यचर्या, पाठ्य-पुस्तक विद्यालय ज्ञान कैसे परिवर्तित किया जाता है?
इकाई 3 : पाठ्यक्रम की संकल्पना
- पाठ्यक्रम की प्रकृति और अर्थ को समझना
- विद्यालय में पाठ्यक्रम की आवश्यकता
- ढाँचागत प्रकृति पाठ्यक्रम : पाठ्यक्रम और विषय के बीच अन्तर और उनके विद्यालयी शिक्षा में महत्त्व
- पाठ्य पुस्तक के विचार
- विषय-वस्तु के पहलू, सबसे महत्त्वपूर्ण पाठ्यक्रम, भारतीय संदर्भ में महत्त्व
- अंतर्विष्ट पाठ्यक्रम का अर्थ एवं संबंध
- विभिन्न स्तरों पर पाठ्यक्रम की दृष्टि : राष्ट्रीय-स्तर, राज्य-स्तर, विद्यालय-स्तर, कक्षा-स्तर और संबंधित मुद्दे (संयोग, संबंध, अंतर)
- पाठ्यक्रम ढाँचा, पाठ्यक्रम और पाठ्यचर्या के बीच अन्तर
- राष्ट्रीय और राज्य-स्तर पर विद्यालयी शिक्षा में पाठ्यक्रम की परम्परा (राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढाँचा के सम्बन्ध में)
इकाई 4 : दृढ़ता पाठ्यक्रम और सोच विचार
- अधिगमकर्ता के स्वभाव पर और ज्ञान के रूप, सीखने वाले के स्वभाव, आवश्यकता और रुचि, सीखने की प्रक्रिया, ज्ञान के प्रकार और अनुशासन और उनके विद्यालय विषय के भिन्न-भिन्न आचरणात्मक
- राष्ट्रीय या राज्य आधार पर पाठ्यक्रम का स्तर पर (i) सामाजिक-राजनीतिक-सांस्कृतिक-भौगोलिक-अर्थशास्त्रिक विविधता (ii) समाज राजनीतिक प्रेरणा, सैद्धान्तिक और शैक्षणिक वास्तविकता के साथ (iii) आर्थिक अनिवार्यता (iv) तकनीकी संभावनाएँ (v) सांस्कृतिक दिशा निर्धारण (vi) राष्ट्रीय प्राथमिकता (vii) सरकार के सिद्धान्त और संबंध क्षमता और (viii) अन्तर्राष्ट्रीय संदर्भ
- शैक्षिक मानक में असमानता, साधारण लक्ष्य और मानदण्ड की आवश्यकताएँ/साधारण विद्यालय के पाठ्यक्रम से संबंधित राष्ट्रीय लक्ष्य और उनकी प्राथमिकताएँ
- विद्यालय के स्तर का विकास और उनके पाठ्यक्रम में विचार – (i) ज्ञान के प्रकार और विद्यालय के विभिन्न विषयों का अभिलाक्षणीकरण (ii) शैक्षिक वस्तुगत के चिन्हित स्तर पर खासियत और संबद्धता (iii) विद्यार्थी के समाज, सांस्कृतिक सम्बन्ध बहुसांस्कृतिक, बहुभाषीय रूप (iv) सीखने वाले की गुणवत्ता (v) शिक्षकों के अनुभव और चिन्तन (vi) खास मुद्दा, पर्यावरणीय चिन्तन, लिंग विभिन्नताएँ, समावेशिता चिन्तन के मूल्य को मिलाकर और इसके मुद्दे, सामाजिक अति संवेदनशीलता
इकाई 5 : पाठ्यक्रम विकास
- पाठ्यक्रम के विकास में विभिन्न उपागमों की समझ – विषय केन्द्रित, पर्यावरणीय (स्थानीय चिन्तन का समावेश), व्यावहारिकता, क्षमता आधारित (सीखने के निम्न स्तर को मिलाकर), रचनात्मक और सीखने की केन्द्रता
- पाठ्यक्रम बनाने की पद्धति : (i) प्रतिपादित लक्ष्य और उद्देश्य (सभी पाठ्यक्रम विषयवस्तु के लक्ष्य पर आधारित) (ii) चुनिंदा ज्ञान के लिए कसौटी और भिन्न-भिन्न विषयों के विषयक प्रश्नों का ज्ञान प्रस्तुतीकरण (iii) मूलभूत विचारों के संगठन और विषयों के विस्तृत स्तर और विषयों का एकीकरण (iv) चुनाव और संगठन को सीखने की स्थिति (v) सीखने के अनुभव का चुनाव (vi) स्रोतों का चयन (vii) मूल्यांकन योजना
- भिन्न-भिन्न विषयों के क्षेत्र में पाठ्यक्रम, समय-प्रबन्धन, पाठ्यक्रम के कार्य सम्पादन के लिए पाठ्य-पुस्तक एक औजार की तरह है, दूसरा सीखने का स्रोत जैसे कि सीखने पर और आई.सी.टी. एक दूसरे को प्रभावित करने वाला चलचित्र, दूसरा शिल्प वैज्ञानिक स्रोत
- पाठ्यक्रम सामग्री का उपयोग और योजना – पाठ्यक्रम सामग्रियाँ, वर्क बुक, हस्तलिखित और अन्य सामग्रियाँ
पाठ्य-पुस्तकें : ज्ञान एवं पाठ्यक्रम — पूनम मदान
Course 9
अधिगम के लिए आंकलन
Assessment for Learning
Credit 4
Theory 80Practicum 20 Full Marks 100
इकाई 1 : आकलन एवं मूल्यांकन का परिचय
- परीक्षा की संकल्पना, मापन, परीक्षा, प्रशंसा, मूल्यांकन और उनके अन्तःसंबंध
- उद्देश्य और मूल्यांकन की विषयवस्तु – स्थापन के लिए, प्रतिपुष्टि प्रदान करने के लिए, पदोन्नति क्रम, प्रमाणन, अधिगम कठिनाई का निदान
- आकलन के प्रकार – (1) उद्देश्य के आधार पर : रचनात्मक, संकलनात्मक, शकुन, नैदानिक; मानक संदर्भ, मापदण्ड संदर्भ (2) प्रकृति और क्षेत्र के आधार पर : शिक्षक कृत, मानकीकृत (3) अनुक्रिया के आधार पर : मौखिक, लिखित, प्रदर्शन (4) संदर्भ के आधार पर : बाह्य, स्वयं एवं शिक्षक (5) प्रकृति के आधार पर सूचनाओं को जमा करना : मात्रात्मक, गुणात्मक
- गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए आकलन एवं मूल्यांकन का महत्त्व, शैक्षिक यंत्रों के रूप में निर्णय लेकर लिखित निर्देशात्मक वैकल्पिक व्यवस्था करना, विषयवस्तु का चुनाव, शिक्षण अधिगम स्रोत, शिक्षाशास्त्र, रणनीतियों और आकलन की प्रक्रिया का अनुसरण करना
इकाई 2 : अधिगम का आकलन
- संज्ञानात्मक की अवधारणा, प्रभावात्मक एवं अधिगम की क्षेत्रीय गतिशीलता एवं भावात्मक क्षेत्र की संकल्पना
- संशोधित वर्गीकरण का उद्देश्य (2001) एवं आकलन
- रचनात्मक सारणी की विशेषता और प्रश्न के विभिन्न रूप (VSA, SA, ET और वस्तुनिष्ठ प्रकार तथा माहौल आधारित)
- संरचना परीक्षण की बनावट – चरण, बनाने की विधि और इसके उपयोग
- उपलब्धि परीक्षणों का निर्माण – चरण, प्रक्रिया एवं उपयोग
- नैदानिक परीक्षण का निर्माण – चरण, उपयोग एवं सीमाएँ
इकाई 3 : अधिगम का मूल्यांकन
- CCE की आवश्यकताएँ एवं इसके महत्त्व और शिक्षकों द्वारा समस्याओं का सामना
- प्रदर्शित यंत्रों का अर्थ और निर्माण की प्रक्रिया, अवलोकन सारणी, जाँच सूची, निर्धारण मापनी
- समूह प्रक्रिया के मूल्यांकन – समूह गतिशीलता के प्रकार, सामाजिक मापनी पद्धति, समूह के गठन के लिए चरण, मूल्यांकन कार्य के लिए कसौटी, सहयोगपूर्ण या सीखने की सहयोगी स्थिति में सामाजिक मूल्यांकन के लिए कसौटी
- उपकरण गुणवत्ता में विश्वास – विश्वसनीयता, वैद्यता तथा क्रियाविधि, विश्लेषण
- पत्राधान मूल्यांकन का अर्थ, कार्यक्षेत्र एवं उपयोग, विकास एवं मूल्यांकन कार्यक्रम शीर्षकों का विकास
इकाई 4 : व्यक्तिगत मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन
- बुद्धि मापन – व्यक्तिगत अथवा समूह, शाब्दिक-अशाब्दिक, शक्ति-चाल
- क्षमता मापन – क्षमता की जाँच एवं उसका उपयोग
- रोचकता के मापन – रोचक आविष्कारक के प्रयोग
- व्यवहार का मापन – व्यवहार पैमाने का उपयोग
- व्यक्तिगत मापन
इकाई 5 : व्याख्या और विद्यार्थियों के अभिनय की सूचना
- विद्यार्थियों के प्रदर्शन की व्याख्या : 1. सांख्यिक व्याख्या (केन्द्रीय प्रवृत्ति की माप और चर के मापन, प्रतिशतता) 2. ग्राफीय प्रस्तुतीकरण (आयत चित्र, आवृत्ति) 3. NPC–प्रतिशतता
- श्रेणीकरण का अर्थ, प्रकार और इसके उपयोग
- साझेदारी की भूमिका की प्रतिपुष्टि (छात्र, माता-पिता, शिक्षक) और शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में सुधार, अधिगमकर्ता की शक्तियों एवं कमजोरी की पहचान
- विद्यार्थियों के प्रदर्शन की सूचना – विकास का विवरण, संचयी सूची, रूपरेखा और उसके प्रयोग पत्राधान
पाठ्य-पुस्तकें : अधिगम के लिए आंकलन — बिपिन अस्थाना
Course 10
एक समावेशी विद्यालय का निर्माण
Creating an Inclusive School
Credit 2
Theory 40Practicum 10 Full Marks 50
इकाई 1 : समावेशी शिक्षा का परिचय
- समावेशी शिक्षा की संकल्पना, अर्थ, कार्य और चुनौतियाँ
- विशेष शिक्षा, संयुक्त शिक्षा और समावेशी शिक्षा के गुण और दोष के बीच भेद
- समावेशी वातावरण की बनावट – शारीरिक, सामाजिक और भावनात्मक (बाधा मुक्त वातावरण)
- विद्यार्थी के लिए समान शिक्षा के अवसर सुनिश्चित करने में अभिभावक, प्रधानाचार्य और शिक्षकों की भूमिका
- भारतीय संदर्भ में समावेशी शिक्षा के तथ्यों और मिथक के प्रसंग
- समावेशी शिक्षा के प्रभावशाली कारक
इकाई 2 : विविध आवश्यकताओं वाले छात्रों का स्वरूप और जरूरतें
- विविध आवश्यकताओं वाले छात्रों की परिभाषा, प्रकार और वर्गीकरण (दृष्टिबाधित, श्रवणबाधित, विस्तृत अधिगम में कठिनाई, गामक और विक्षिप्त मांसपेशी विकार, दिमागी पक्षाघात, मंदबुद्धि, स्वलीनता, कुष्ठ रोगी, मानसिक रोग और बहुदिव्यांगता, विशेष स्वास्थ्य समस्या, प्रतिभाशाली, सृजनात्मक, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, छात्राओं, ग्रामीण छात्रों, अल्पसंख्यक बहुभाषाई छात्र, गली के बच्चे, प्रवासी श्रमिकों के बच्चे और अनाथ)
- अनुसंधान के साक्ष्य के आधार पर विविध आवश्यकताओं वाले छात्रों की शैक्षिक आवश्यकताएँ एवं विशेषताएँ
- एक समावेशी विद्यालय की अवधारणा – आधारभूत संरचना और उपलब्धता, मानव संसाधन, विकलांगता से व्यवहार, पूर्ण विद्यालय दृष्टिकोण, समुदाय आधारित शिक्षा
- समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में विविध आवश्यकताओं वाले बच्चों (छात्रों) के लिए सहायक संसाधन और सेवाएँ
इकाई 3 : विविध आवश्यकताओं वाले छात्रों के लिए शैक्षिक योजनाएँ, प्रबन्धन और मूल्यांकन तकनीकी
- अनुकूलन के लिए महत्त्व और आवश्यकता (विविध आवश्यकताओं के तहत आने वाले छात्रों की विभिन्न श्रेणियों के लिए माध्यमिक स्तर पर विभिन्न विषयों को सीखाने के लिए कार्यप्रणाली और सहमति)
- माध्यमिक स्तर के अनुकूल विज्ञान, सामाजिक अध्ययन, गणित और भाषा पढ़ाने के लिए दिशा निर्देश
- समावेशी शिक्षा के प्रभावशाली कार्यान्वयन के लिए शैक्षिक कार्यवाही
- समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में सुधारों और मूल्यांकन को लागू करने में शिक्षकों की भूमिका – अनुकूलन के प्रकार, विविध आवश्यकताओं वाले छात्रों के लिए उपयोग किया गया रणनीति में समायोजन, आकलन और मूल्यांकन, सतत् और व्यापक मूल्यांकन का महत्त्व
- नियुक्ति, ग्रेडिंग, पदोन्नति और प्रमाण-पत्र के लिए प्रयुक्त कार्यक्रमों और प्रक्रियाओं के मूल्यांकन में एकरूपता लाना
पाठ्य-पुस्तकें : समावेशी विद्यालय का सर्जन — ज्योत्सना / यतीन्द्र ठाकुर
Course 11
ऐच्छिक पाठ्यक्रम : व्यावसायिक कार्य / शिक्षा
Optional Course – Vocational Work / Education
Credit 2
Theory 40Practicum 10 Full Marks 50
छात्राध्यापक नीचे दिए गए विकल्पों में से कोई एक ऐच्छिक पाठ्यक्रम चुनेंगे।
1. सिलाई (Tailoring) Tailoring
इकाई 1 : सिलाई का परिचय
- सिलाई मशीन की जानकारी
- मशीन चलाते समय अपनाई जाने वाली सुरक्षा सावधानियाँ
- सिलाई मशीन का रखरखाव
- मशीन एवं टाँकों में मरम्मत और सुधार
- सिलाई के उपयोगी सामान; सुई एवं धागों की जानकारी
इकाई 2 : तकनीक एवं पैटर्न
- शरीर की बनावट के अनुसार माप की तकनीक एवं जानकारी, कटाई करते समय सावधानियाँ, उत्तम सिलाई के लिए उपयोगी सुझाव
- पैटर्न; सिलाई में टाँकों के पैटर्न – व्हिपिंग, स्लिप, बटन-होल, ओवर सिलिंग, सादी सीवन, ओवरकास्ट सीवन, सजावटी टाँके
- सिलाई में सहायक सामग्री का प्रयोग – बटन, इलास्टिक, ज़िप; कफ़, कॉलर, पट्टी, फेसिंग एवं अस्तर, आस्तीन एवं जेबों की विविधता
इकाई 3 : विभिन्न प्रकार के परिधान
- बच्चों के परिधान : नवजात शिशु की आवश्यक वस्तुएँ, कपड़े की नैपी, साधारण बेबी सूट, ज़बला सेट, बाबा सूट, बच्चों के दैनिक परिधान, नाइट सूट, फ्रॉक (ए-शेप, सादी, अम्ब्रेला, पार्टी), स्कूल यूनिफ़ॉर्म (स्कर्ट एवं ब्लाउज़)
- लड़कियों एवं महिलाओं के परिधान : पेटीकोट, कली वाला पेटीकोट, टयूनिक, टॉप, सलवार-कुर्ता, सामान्य सलवार, कुर्ता, ब्लाउज़, चोली ब्लाउज़, कमीज़
- लड़कों एवं पुरुषों के परिधान : दैनिक परिधान, अंतःवस्त्र, पायजामा, चूड़ीदार पायजामा, कुर्ता, शर्ट, पतलून, शॉर्ट्स, टी-शर्ट, नाइट सूट
2. कढ़ाई (Embroidery) Embroidery
इकाई 1 : कढ़ाई का परिचय
- कढ़ाई का इतिहास – महाभारत, रामायण एवं सिन्धु घाटी सभ्यता; परिधानों की सजावट के सन्दर्भ में
- राजकीय परिधान – पर्दे, गद्दी, दीवार टँगाई, राजसी वस्त्र एवं सिंहासन के चँदोवे में कढ़ाई का प्रयोग
- कढ़ाई शिल्प के विकास में मुगलों एवं ईस्ट इंडिया कंपनी का संरक्षण
- रूपांकन एवं डिज़ाइन के स्रोत एवं प्रेरणा – प्रकृति, आभूषण, चित्रकला आदि
- देश के प्रत्येक राज्य की पारम्परिक कढ़ाई के केन्द्र एवं विकास
इकाई 2 : कला के तत्त्व एवं सिद्धान्त
- रेखा, रूप, बनावट, रंग, पैटर्न, प्रकाश एवं अन्तराल का अध्ययन
- कला के सिद्धान्त : सामंजस्य, सन्तुलन, पुनरावृत्ति, लय, अनुपात एवं बल
- डिज़ाइन का स्थान निर्धारण – ऊर्ध्वाधर, क्षैतिज, तिर्यक, आधा-गिराव आदि
- डिज़ाइन के प्रकार : प्राकृतिक, परम्परागत, सजावटी, अमूर्त
- रंगों की समझ एवं प्रयोग : प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक रंग; रंग की विशेषताएँ – ह्यू, वैल्यू, तीव्रता; गर्म/ठंडे रंग, रंग संगतियाँ – एकवर्णी, पूरक, समरूप आदि
- रंगों के चुनाव को प्रभावित करने वाले कारक
इकाई 3 : कढ़ाई के उपकरण एवं तकनीकें
- कढ़ाई के औजार एवं उपकरण का अध्ययन, विशेषकर सुई एवं धागों के प्रकार
- मूल कढ़ाई टाँके – तना टाँका, चेन, साटन, लम्बा एवं छोटा टाँका आदि
- भारत की पारम्परिक कढ़ाइयों का अध्ययन : बंगाल की कांथा, बिहार की सुजनी, पंजाब की फुलकारी, कर्नाटक की कसूती, कश्मीर की कशीदा एवं ज़रदोज़ी, लखनऊ की चिकनकारी
3. चमड़ा शिल्प (Leather Craft) Leather Craft
इकाई 1 : चमड़े की सिलाई के औजार एवं सहायक सामग्री
- चमड़े की सिलाई हेतु आवश्यक औजार एवं सहायक सामग्री
- सिलाई मशीनों के प्रकार – फ्लैट, पोस्ट एवं सिलिंडर बेड; मशीन की कार्यप्रणाली, समस्याओं की पहचान एवं निवारण, सुरक्षा सावधानियाँ
- अस्तर सामग्री एवं उनका उपयोग; फिटिंग एवं फास्नर
- सुई की नोक, आकार (नम्बर) एवं भाग
- विभिन्न प्रकार के धागे, आकार एवं गुणवत्ता मानक
इकाई 2 : मूल कटाई अभ्यास
- कटाई की विधियाँ : (i) हाथ से कटाई (ii) मशीन से कटाई
- पैटर्न नेस्टिंग
- चाकू का प्रयोग करते समय सुरक्षा सावधानियाँ
- कटाई में सामग्री की बर्बादी कम करना
इकाई 3 : चमड़े पर सिलाई का अभ्यास
- टाँकों के प्रकार – लॉक स्टिच, चेन स्टिच, ज़िग-ज़ैग स्टिच, ओवरलॉक स्टिच
- विभिन्न प्रकार के चमड़े पर सिलाई
- चमड़े की ग्रेडिंग एवं छँटाई
- सीवन के प्रकार
- चमड़े के उत्पादों के प्रकार
- किनारों के उपचार के प्रकार
- सुई एवं धागा टूटने के कारण एवं निवारण
- चमड़े के उत्पादों के लिए चिपकने वाले पदार्थ
4. बागवानी एवं उद्यानिकी (Horticulture & Gardening) Horticulture & Gardening
इकाई 1 : उद्यान डिज़ाइन
- बागवानी का क्षेत्र एवं उद्देश्य
- उद्यानों की शैलियाँ : औपचारिक, अनौपचारिक; उद्यानों के प्रकार – अंग्रेज़ी, मुगल एवं जापानी
- उद्यान के घटक
- बाहरी उद्यानों की योजना : छोटा, आवासीय, बड़ा घरेलू, छत उद्यान, टैरेस उद्यान, बच्चों का उद्यान, विद्यालय एवं संस्थागत उद्यान, पार्क, औद्योगिक उद्यान, आवासीय परिसर, इनडोर बागवानी
इकाई 2 : विशिष्ट उद्यान
- जड़ी-बूटी उद्यान, गुलाब उद्यान, दलदली उद्यान, धँसा हुआ उद्यान, टोपियरी उद्यान, रसोई उद्यान, पक्का उद्यान, थाली उद्यान, रॉक गार्डन, टैरेस गार्डन, जल उद्यान एवं बोतल उद्यान (टेरेरियम)
- कंटेनर/गमला उद्यान की अवधारणा एवं डिज़ाइन
इकाई 3 : नर्सरी उत्पादन एवं प्रबन्धन
- क्षेत्र, स्थल, मिट्टी (प्रकार, जल धारण क्षमता, क्षेत्र क्षमता, विद्युत चालकता, pH), पर्यावरण (जलवायु की जानकारी), लेआउट, खाद, उर्वरक, रखरखाव, उद्यान के औजार, संवर्धन एवं उद्यान पंचांग, नर्सरी क्यारियाँ, कीट एवं रोग प्रबन्धन, हाई-टेक नर्सरी
- सजावटी फूलों/पौधों का बीज, दाब कलम (लेयरिंग) द्वारा प्रवर्धन; कायिक प्रवर्धन तकनीकें – कलम, कलिकायन, कलम बाँधना (ग्राफ्टिंग), ऊतक संवर्धन
- कन्द वाले पौधों का प्रवर्धन : स्केलिंग, स्कूपिंग, बल्बिल, विभाजन, कटिंग
- उद्यान एवं भू-दृश्य अभिकल्पन में वृक्षों का महत्त्व
- भू-आवरण पौधे, सजावटी फर्न, शाकीय बहुवर्षी, वार्षिक एवं द्विवार्षिक पौधे : महत्त्वपूर्ण वंश एवं प्रजातियाँ, उद्यान डिज़ाइन में उनका महत्त्व; ऑर्किड – पर्यावरण, प्रवर्धन, गमलों में रोपण एवं खाद, पोषक तत्त्व, सिंचाई, महत्त्वपूर्ण प्रजातियाँ
5. कृषि (Agriculture) Agriculture
इकाई 1 : वैज्ञानिक कृषि की अवधारणा एवं विधि
- वैज्ञानिक कृषि के महत्त्व की सराहना करने की क्षमता, फसल हेतु भूमि का चयन, भूमि के टुकड़े के लिए फसल का चयन, अतिरिक्त व्यवसाय के रूप में फसल, फल एवं सब्जियाँ उगाने की क्षमता
- कम्पोस्ट अभियान एवं भूमि सुधार आन्दोलन के महत्त्व को समझने की क्षमता
- मौसम के अनुसार फसल योजना तैयार करने की क्षमता एवं अभ्यास
इकाई 2 : भण्डारण एवं विपणन
- अनाजों के भण्डारण, बाज़ार के लिए तैयारी का ज्ञान एवं अभ्यास
- सामान्य बजट, लाभ-हानि के लेखे की तैयारी का ज्ञान
- श्रम की गरिमा की सराहना
इकाई 3 : सब्जी उद्यान (वेजिटेबल गार्डनिंग)
- अपेक्षित अभ्यास : सब्जी बागवानी का अभ्यास – (a) रसोई उद्यान परिसर का नक्शा बनाना (b) बीज क्यारी/बीज बोने में पौध तैयार करने का अभ्यास (c) पौध रोपण (कुछ सब्जियों में आवश्यक) (d) बढ़ते पौधों की नियमित देखभाल (e) मौसमी अनाज उगाने का अभ्यास
6. कताई (Spinning) Spinning
इकाई 1 : खादी बनाने का इतिहास एवं प्रक्रिया
- खादी का इतिहास; वस्त्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के उद्देश्य से खादी तैयार करने की क्षमता
- कपास चुनना एवं उसकी प्रसंस्करण प्रक्रिया – सफाई, ओटना (जिनिंग), धुनाई, कार्डिंग, मध्यम/पिर्जन कार्डिंग, कार्डिंग का प्रसार एवं पूनी बनाना में ज्ञान एवं अभ्यास
- सूत कताई में दक्षता
- सूत का वज़न, सूत की संख्या (काउंट), सूत की मजबूती एवं तैयार उत्पाद का अनुमान लगाने की क्षमता
इकाई 2 : विपणन एवं लेखा
- बाज़ार के लिए खादी उत्पादों की तैयारी
- लाभ-हानि निकालने की क्षमता
- लेखा रखने की क्षमता – स्टॉक रजिस्टर, उत्पादन रजिस्टर, निस्तारण रजिस्टर, तुलन-पत्र (बैलेंस शीट) आदि
इकाई 3 : गांधीवादी विचार
- गांधीजी के विचार : प्रबुद्ध नागरिकता, कार्य का मूल्य; मनुष्य एवं मशीन; चरित्र के बिना ज्ञान, चरित्र के बिना शिक्षा
- क्या इंटरनेट खादी की भावना की पूर्ति कर सकता है? गांधीवादी मूल्यों के संवर्धन में इंटरनेट की भूमिका, वैश्वीकरण एवं महात्मा गांधी की बुनियादी शिक्षा
7. कलात्मक शिल्प (Artistic Craft) Artistic Craft
इकाई 1 : ज्यामितीय त्रिविमीय (3D) वस्तु अध्ययन – कम से कम 5 कार्य
- संरचना की मूल समझ विकसित करना – विभिन्न स्थितियों एवं कोणों में विस्तृत रेखाचित्र; मूल आकृतियों एवं रूपों को समझना
- मूल ज्यामितीय आकृतियाँ – वर्ग, आयत, बेलन, शंकु, प्रतिच्छेदी त्रिभुज, अर्द्ध-गोलाकार त्रिविमीय आकृतियाँ एवं वृत्त
- माध्यम – पेंसिल, कोंते (काला एवं भूरा)
इकाई 2 : संरचना एवं चरित्र अध्ययन – कम से कम 2 कार्य
- संरचना निर्माण में संचालन सम्बन्धी समस्याएँ – पर्णसमूह एवं तना
- संरचना की मूल समझ हेतु अध्ययन – झुकना, मुड़ना, प्रकृति से निर्मित वक्र आकृतियाँ
- इकाई द्वारा संरचना का विस्तार
- ज्ञात एवं अज्ञात लयबद्ध त्रिविमीय रूप के सामग्री-संयोजनों के साथ प्रयोग
- माध्यम – तार, प्लास्टर ऑफ पेरिस, मिट्टी आदि
इकाई 3 : जैविक एवं अजैविक रूप – अध्ययन एवं संयोजन (कम से कम 2 कार्य)
- त्रिविमीय मूर्तिकला की मूल समझ हेतु रेखांकन एवं संयोजन अभ्यास – आर्मेचर, मैचेट की स्थिति, अन्तराल, गोलाई, निर्मित छवियों की जीवन्तता
- माध्यम – मिट्टी, प्लास्टर ऑफ पेरिस, कागज़ – माउण्ट बोर्ड, मोम आदि
- खोजी वस्तुओं से अध्ययन – जटिल रेखाचित्र, छवियों का विस्तार तथा पूर्ण त्रिविमीय मूर्तिकला निर्माण
- आकृतिमूलक एवं अमूर्त – मिट्टी माध्यम से उच्च/निम्न उभार (रिलीफ) कार्य – टेराकोटा, मिट्टी की तैयारी, मिट्टी के औजारों का प्रयोग, रेखा, बनावट, आकार
8. स्वास्थ्य और शारीरिक शिक्षा Health and Physical Education
इकाई 1 : स्वास्थ्य, बचाव और सुरक्षा की वैचारिक समझ
- किशोरावस्था और बच्चे की स्वास्थ्य आवश्यकता जो विभिन्न योग्य बच्चे को शामिल करते हैं, उनके स्वास्थ्य का वैचारिक महत्त्व विस्तार निर्धारण करें
- शरीर की व्यवस्था की समझ – कंकालतंत्र, मांसपेशीय, श्वास-सम्बन्धी, परि-संचारी और पाचक में संबंध; स्वास्थ्य योग्यता, हड्डी, मांसपेशी और जुड़ाव से तथा उनके कार्य, आम हड्डियों के कार्य की विवेचना करें
- आम स्वास्थ्य समस्या और बीमारी (रोग) (संक्रामक रोग – खसरा, चेचक, काली खाँसी, तपेदिक) इनके कारक, बचाव, सुधार, प्रतिरक्षण और प्राथमिक उपचार की समझ विकसित करें
- प्रजननीय और यौन स्वास्थ्य – RTI (सूचना का अधिकार), STR, HIV/AIDS, जिम्मेदार यौन व्यवहार की विवेचना करें
इकाई 2 : पोषण और खाद्य पदार्थ
- खाद्य पदार्थ और पोषण, संतुलित आहार, भोजन की आदत, भोजन का समय, पोषण और उनका कार्य मूल्यांकन करें
- भारतीय आहार की भिन्नता, मौसमीय भोजन और त्योहार, आहार पकाने में समय बदलाव, भोजन परिरक्षण का आधुनिक और देशज तरीके की विवेचना करें
- भोजन का आर्थिक बदलाव में नित्य प्रयोग और इनकी सार्वभौमिकता को प्रदर्शित करें
- नित्य प्रयोग से संबंधी खान-पान, स्वास्थ्य विज्ञान, कुपोषण, मोटापा, खाना और जल संक्रामक रोग से कमी और बचाव के उपायों की विवेचना करें
इकाई 3 : शारीरिक योग्यता के बारे में जानकारी
- शारीरिक योग्यता, मजबूती, सहनशीलता और लचीलापन, इसके घटक, खेल-कूद योग्यता, देशज और आत्म-बचाव कार्य को मूल्यांकित करें
- खेल और खेल-कूद : Athletics (General Physical Fitness Exercise), खेल (Lead of Games, Relays और Major Games), लयबद्ध व्यायाम का स्वास्थ्य पर पड़ने वाला प्रभाव की विवेचना करें
- योग पद्धति – योग का महत्त्व, योगासन, क्रिया, प्राणायाम को मूल्यांकित करें
- संस्था की भूमिका – विद्यालय, परिवार और खेल-कूद स्वास्थ्य सेवा, नीतियाँ और मुख्य स्वास्थ्य और शारीरिक शिक्षा-संबंधित प्रोग्राम, रक्त भंडार, मीडिया की भूमिका को स्पष्ट करें
पाठ्य-पुस्तकें : शारीरिक स्वास्थ्य एवं योग शिक्षा — श्री कृष्ण पटेल
9. शान्ति शिक्षा Peace Education
इकाई 1 : शान्ति एक गतिशील सामाजिक वास्तविकता
- शान्ति की प्रासंगिकता
- शान्ति के लिए चुनौतियाँ – बढ़ता दबाव, द्वन्द्व, अपराध, आतंकवाद, हिंसा और कमजोर वर्ग के जीवन पर लड़ाई-झगड़ा का परिणाम
- शान्ति संदर्भ – मूलभूत धारणा, प्रक्रिया और अनिवार्यता
- संवैधानिक मूल्य और शान्ति का महत्त्व आमने-सामने : स्वभाव का महत्त्व, विश्वास और शान्ति का महत्त्व, दया, सहयोग, प्यार आदि; न्याय का संवैधानिक मूल्य और आंतरिक शान्ति की बढ़ोत्तरी, गुणवत्ता, आजादी, समाज में मतभेद और पारिस्थितिक संसाधनों के लिए सम्मान ताकि शान्ति कायम रहे
- एकता की नींव – दयालु और नैतिक निर्णय करने और सांस्कृतिक तालमेल, जिम्मेदार नागरिक, प्रजातांत्रिक विचार और धर्मनिरपेक्षता का आदर – अहिंसा के आधार पर; मतभेद दूर करने के प्रति सम्मान; जैसे – सामाजिक-आर्थिक, लिंग इत्यादि की भूमिका। सतत् विकास के साथ तालमेल बिठाना
- शान्ति के दार्शनिक चिन्तन करने की विभिन्न विशिष्टताएँ – गाँधी, कृष्णमूर्ति, अरविन्दो, बधेका, दुलाई लामा – राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनके विचार
इकाई 2 : द्वन्द्व, ध्यान और द्वन्द्व के परिवर्तन को समझना
- द्वन्द्व की प्रकृति – आवश्यकताओं और आकांक्षाओं की असंगति; समाज में विभिन्न स्तरों पर द्वन्द्व के परिणाम – पारम्परिक, पारम्परिक, संगठनात्मक, अन्तर्राज्यीय और वैश्विक
- सामाजिक अवस्था और प्रगति के रूपों को समझना जो द्वन्द्व को बरकरार रखता है – सीमित साधन, गरीबी, राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिस्थितिक अवस्था, पर्यावरणीय संसाधन यानी जल, जंगल, ऊर्जा आदि
- ध्यान और द्वन्द्व परिवर्तन की क्षमता को विकसित करना – स्वयं की पहचान की जागरूकता, सांस्कृतिक आधार और संप्रेषण कौशल का विकास, द्वन्द्व के विषय की जागरूकता/ज्ञान, ध्यान के लिए संकल्पित, वैकल्पिक कार्यनीतियों को तलाशना, कौशल और सृजनात्मक निदान द्वन्द्व पर विजय पाने/उसके रूप को परिवर्तित करने हेतु
इकाई 3 : शान्ति पाने के लिए शिक्षा
- शान्ति शिक्षा के लिए पाठ्यक्रम और शिक्षण विधि पर महत्त्वपूर्ण समीक्षा
- शिक्षण में रचनावादी दृष्टिकोणों को अधिगम हेतु पारम्परिक मॉडलों की चुनौती
- लोकतांत्रिक संदर्भों से अधिकार सम्बन्धों पर पुनर्विचार – वार्तालाप को बढ़ावा और निर्णय लेने के योग्यता का विकास
- स्थानीय संदर्भों में सामाजिक न्याय को समझना – विश्वास के लिए उलझना, व्यवहार और मूल्य और विद्यालय/सामाजिक प्रथाएँ या मान्यताएँ और सभी स्तरों पर विरोधाभासी समाधान
- तनाव को कम करने के लिए शैक्षणिक कौशल और कार्यनीतियों को समझना, परीक्षा का डर, तनाव/उलझन, शारीरिक दंड, द्वन्द्व और हिंसा विद्यालयीय स्तर पर
- प्रासंगिक ज्ञान के लिए शान्ति शिक्षक का बनना, स्वभाव/व्यवहार, मूल्य/महत्त्व और कौशल
- शान्ति के बढ़ावे के लिए शैक्षणिक विषयक ज्ञान का शिक्षण और अधिगम का विकास
- मूल्यांकन के लिए मानवीय दृष्टिकोण
- स्थानीय सामुदायिक स्तर पर या विद्यालयीय स्तर पर शान्ति का संवाहक बनाना
- विद्यालय के आस-पास स्थानीय समुदायों की सांस्कृतिक विशेषताओं के बारे में जागरूकता और इसके सम्पर्क की गुणवत्ता, परवरिश शैली, अनुशासित व्यवस्था, आर्थिक व्यवस्था, बोल-चाल वाला संस्कार, घरेलू हिंसा, शिक्षा के प्रति स्वभाव आदि
- स्वास्थ्य के लिए जागरूकता, योगा, प्रभावशाली प्रसंग, संप्रेषण व्यवहार, विद्यालय के आस-पास ध्यान के लिए द्वन्द्व
- संतुलित मीडिया विस्तार के लिए विद्यार्थियों के स्वभाव में जागरूकता और आधार बनवाना
पाठ्य-पुस्तकें : मूल्य एवं शान्ति शिक्षा — सौरभ सिंह
10. मार्गदर्शन और परामर्श Guidance and Counselling
इकाई 1 : विद्यालयों में छात्रों की आवश्यकता एवं समस्या
- शिक्षार्थियों की मदद कर स्वयं को समझना – लोगों की स्वयं शक्तियों और कमजोरियाँ, स्वयं का सम्मान करना, आत्म-अवधारणा, आत्म-विश्वास
- मार्गदर्शन और परामर्श की अवधारणा – मार्गदर्शन और परामर्श की भूमिका और जरूरत, मार्गदर्शन सेवाओं, प्रकृति, क्षेत्रों और मार्गदर्शन और परामर्श करने के लिए अलग-अलग दृष्टिकोण रखना
- शैक्षणिक – सीखने में कठिनाइयाँ, सावधानी, आशा से कम उपलब्धि, तनाव, अनुशासनहीनता, छोड़ना, विद्यालयी हिंसा की विवेचना करें
- व्यक्तिगत समाज – व्यवहारवादी मनोवैज्ञानिक, रवैयात्मक समस्याओं को समझें
- व्यावसायिक – पेशायोजना, व्यावसायिक विकास और व्यावसायिक सूचना के बारे में बताएँ
- निःशक्तजन, हानि/दोष, रचनात्मक और प्रतिभावना विद्यार्थियों का समूह की विवेचना करें
इकाई 2 : विद्यालयों में मार्गदर्शन के लिए विकासशील संसाधन
- मानव संसाधन – शिक्षक की भूमिका, शिक्षक-परामर्शदाता, व्यावसायिक परामर्शदाता, परामर्शदाता, चिकित्सा अधिकारी, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कार्यकर्ता की भूमिका स्पष्ट करें
- शारीरिक और द्रव्यात्मक संसाधन – पेशाकोण पेशे की कठिनाई, पेशा साहित्य में चार्ट्स और विज्ञापन को शामिल कर, मनोवैज्ञानिक, जाँच, द्रव्य और उसके उपयोग की भूमिका बतायें
- विद्यालय समुदाय संयोजन, PTAS की भूमिका, समिति, सम्बन्धित एजेंसियों की भूमिका स्पष्ट करें
इकाई 3 : विद्यालयों के लिए न्यूनतम मार्गदर्शन कार्यक्रम
- समूह मार्गदर्शन क्रियाकलाप – कार्यक्रम का उन्मुखीकरण, कक्षा वार्तालाप और पेशे से सम्बन्धित वार्तालाप, पेशे से सम्बन्धित प्रदर्शन, कार्यशाला और समूह परिचर्चा
- परामर्श – व्यक्तिगत और समूह परामर्श
- जाँच कार्यक्रम – मानसिक योग्यता, रुचि, रवैया और योग्यता
- सामुदायिक संग्रहों का विकास और रखरखाव करना
पाठ्य-पुस्तकें : निर्देशन एवं परामर्श — राधा बल्लभ उपाध्याय
Course EPC 4
ई.पी.सी.–4 : स्वयं की समझ
Understanding the Self
Credit 2
Theory 40Practicum 10 Full Marks 50
इकाई 1 : स्वयं को समझना
- आत्म जागरूकता – स्वयं के चरित्र की पहचान, आत्म-विश्वास, आत्म-मूल्य, आत्म-सम्मान और स्वयं का विकास और आत्म-मूल्यांकन
- एक सकारात्मक सोच के साथ अपने दायित्व, मूल्य, परिवार में जिम्मेदारी, विद्यालय, पड़ोस आदि को समझना एवं एक अनुशासन में रह कर और बिना हिंसा के अपने आप को समझना
- एक शिक्षक के व्यावसायिक दृष्टिकोण को विकसित करना
- स्वयं पर सामाजिक परिवेश के प्रभाव के बारे में जागरूकता
- नकारात्मक अनुभव तनाव एवं क्रोध उत्पन्न करता है, इसको समझना
इकाई 2 : योगा और स्वयं के परिप्रेक्ष्य में इसकी भूमिका
- योगा, ध्यान, क्रोध, तनाव प्रबन्धन से सकारात्मक स्वास्थ्य और सकारात्मक स्वभाव-व्यवहार में परिवर्तन को समझना
- स्वयं पहचान की जागरूकता, सामाजिक पहचान और अपनी सांस्कृतिक आधार की समझ होना
- ध्यान के लिए विकासशील क्षमता विकसित करना – परस्पर विरोधी दलों को सुनना, द्वन्द्व विषयों के प्रति जागरूकता, शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच की टकराव/द्वन्द्व
- टकराव/द्वन्द्व के लिए वैकल्पिक कार्यनीतियाँ और उनके रचनात्मक समाधान या उसके परिवर्तित रूप
इकाई 3 : एक मानवीय शिक्षक होना
- स्वयं के प्रति आलोचनात्मक चिन्तन का ज्ञान, जैसे – भूतकाल में बहुत अधिक नकारात्मक अनुभवों का तजुर्बा, पिछला बीते हुए नकारात्मक अनुभव को प्रदर्शित करना
- संवेदनशीलता का विकास, संवेदना का महत्त्व
- संप्रेषण कौशल का विकास – दूसरों की सुनना, दूसरों के प्रति सहानुभूति रखना, दूसरों पर विश्वास करना, अपने अनुभवों को दर्शाना/बताना, साफ गैर-निर्णयात्मक प्रतिक्रिया देना
- आत्म-अनुशासित रहना, स्वःप्रबन्धित रहना
- पूर्वाग्रह, पक्षपात, घिसी-पिटी सोच को हटाकर, विभिन्न सांस्कृतिक आयाम को स्वीकार करना
- नैतिक व्यवहार, कुशल बनना, सकारात्मक रहना, अहिंसा को स्वीकारना, दूसरों के प्रति प्यार और सहानुभूति दर्शाना, दूसरों के प्रति दया-भाव रखना
- अपने दैनिक अनुभवों के प्रति आलोचनात्मक चिन्तन करना; साथ रिपोर्ट तैयार करना (व्यक्तिगत कार्य)
इकाई 4 : शैक्षणिक लेखन में समाविष्ट
- यह विषय किसी एक लेखक के शैक्षणिक आलेख, कहानी, निबंध अथवा एक खास सार हो सकता है, जिसमें शिक्षा, विद्यालय, शिक्षण या अधिगम पर चर्चा किया गया हो और उसमें एक खास विषय के सामयिक विषय पर चर्चा अथवा कथन की चर्चा की गई हो, जो ऊपर की बातों में से एक हो। छात्राध्यापक इसकी इकाई के लिए खंडों में विभाजित हो कर समझ सकते हैं।
पाठ्य-पुस्तकें : स्वयं की पहचान — पायल भोला जैन
School Internship
विद्यालय इन्टर्नशिप
School Internship
Credit 10
Full Marks 250
विद्यालय इन्टर्नशिप – 10 क्रेडिट, पूर्णांक 250। (इसका विस्तृत पाठ्यक्रम भेजी गई PDF में शामिल नहीं है।)