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विवरणिका बी.एड. एवं डी.एल.एड. पाठ्यक्रम · सत्र 2026-28

विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान का एक प्रकल्प — लोक शिक्षा समिति, बिहार द्वारा संचालित। NCTE-ERC, भुवनेश्वर से मान्यता प्राप्त; बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर एवं बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना से सम्बद्ध।

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भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय भवन, सदातपुर, मुजफ्फरपुर
Bharti Shikshak Prashikshan Mahavidyalaya
सदातपुर, N.H.-28, सुधा डेयरी के सामने, मुजफ्फरपुर – 843108, बिहार
9709533351 (O), 9204370116, 7905126451 (P)
www.bspmahavidyalaya.org

प्राचार्य का संदेश

डॉ. राकेश कुमार पाल, प्राचार्य

प्रिय प्रशिक्षुओं,
भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के इस नवीन शैक्षणिक सत्र में आप सभी का हार्दिक अभिनंदन है। शिक्षक समाज का दर्पण होता है और एक आदर्श समाज के निर्माण की आधारशिला एक कुशल शिक्षक ही रखता है। हमारा महाविद्यालय इसी उत्तरदायित्व को समझते हुए छात्र-छात्राओं के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

“हम कल के प्रभावी और आदर्श शिक्षकों का निर्माण करते हैं।”

हमारा प्रयास है कि हम आपको एक ऐसा वातावरण प्रदान करें, जहां शैक्षणिक उत्कृष्टता और व्यावहारिक ज्ञान का समावेश हो। शिक्षण केवल एक पेशा नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य को संवारने की एक पवित्र जिम्मेदारी है। कॉलेज परिसर सुरक्षित वातावरण, अत्याधुनिक स्मार्ट क्लासरूम, सुसज्जित विज्ञान एवं कम्प्यूटर प्रयोगशालाएँ और एक विस्तृत पुस्तकालय से सुसज्जित है।

मेरा मानना है कि बिना अनुशासन के शिक्षा अधूरी है। हमारे महाविद्यालय में समयबद्धता, नियमितता और उच्च नैतिक मूल्यों के पालन पर विशेष बल दिया जाता है। मुझे विश्वास है कि यहाँ का शैक्षणिक अनुभव आपके जीवन में एक मील का पत्थर साबित होगा। मैं आप सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ।

शुभकामनाओं सहित,डॉ. राकेश कुमार पालप्राचार्य, भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय

महाविद्यालय नियमावली

प्रवेश लेने वाले सभी प्रशिक्षुओं के लिए अनिवार्य।

  • महाविद्यालय के दो वर्षीय पाठ्यक्रम के बीच में प्रशिक्षण छोड़ने की स्थिति में, प्रशिक्षु को पूरे दो वर्षों का शुल्क जमा करना अनिवार्य होगा।
  • शिक्षण शुल्क निर्धारित समय पर जमा करें।
  • सैद्धांतिक कक्षा में 80 एवं प्रायोगिक कार्य में 90 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है। वर्षान्त में उपस्थिति पूर्ण नहीं होने की स्थिति में परीक्षा की अनुमति नहीं प्राप्त होगी।
  • लगातार 15 दिनों तक अनुपस्थित रहने पर नामांकन निरस्त हो जायेगा।
  • महाविद्यालय समय में अवकाश की अनुमति नहीं है।
  • कक्षा कक्ष में मोबाईल पूर्णतः प्रतिबंधित है।
  • महाविद्यालय परिसर में निषेधित पदार्थों का प्रयोग करना वर्जित है।
  • सभी प्रशिक्षुओं को महाविद्यालय द्वारा निर्धारित वेशभूषा में ही उपस्थित रहना अनिवार्य है। निर्धारित वेशभूषा में नहीं रहने पर अनुशासनहीनता समझा जाएगा।
  • महाविद्यालय में वन्दना से अवकाश तक उपस्थिति अनिवार्य है।
  • महाविद्यालय और प्राध्यापकों द्वारा निर्देशित कार्यों एवं आवश्यक दस्तावेज (फाइल) को पूर्णतः सम्पादित कर ससमय निश्चित रूप से जमा करें।
  • महाविद्यालय के समस्त पाठ्य सहगामी क्रियाओं में सहभागिता अनिवार्य हैं। सूचनाओं का पालन नहीं करने पर अनुशासनहीनता माना जाएगा।
  • कार्यालय, पुस्तकालय एवं ICT कक्ष में दिए गए निर्देशों का पालन अवश्य करें।
  • महाविद्यालय को स्वच्छ रखने में पूर्णतः सहयोग की अपेक्षा है।
  • महाविद्यालय की संपत्ति को क्षति पहुँचाने वाले से क्षति-पूर्ति वसूल की जायेगी।
  • प्रथम आंतरिक परीक्षा में उत्तीर्ण प्रशिक्षुओं को ही वार्षिक आंतरिक परीक्षा में सम्मिलित होने की अनुमति प्राप्त होगी।

उद्देश्य (Mission) एवं दृष्टि (Vision)

उद्देश्य (Mission)

  • सरकार द्वारा संचालित उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ-साथ समितियों और ट्रस्टों के साथ निरंतर गहन संबंध और संवाद स्थापित करना।
  • सभी हितधारकों की क्षमताओं के विकास के प्रयासों में उनका सहयोग करना।
  • भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित एक सतत एवं समग्र दृष्टिकोण के साथ शिक्षण और अधिगम सामग्री विकसित करना।
  • क्रियाशोध आधारित परियोजनाएं संचालित करना।
  • विभिन्न पाठ्यक्रमों में विषय विशेषज्ञों एवं कुशल प्रशिक्षकों का निर्माण और विकास करना।
  • छात्रों, शिक्षकों और प्रबंधन के लिए बहुआयामी कार्यक्रम विकसित करना।
  • प्रशिक्षुओं में नवाचार, अनुशासन और शिक्षण कौशल का विकास करना ताकि वे भविष्य की शैक्षिक चुनौतियों का सामना कर सकें।
  • प्रायोगिक प्रशिक्षण और निरंतर सीखने की संस्कृति के माध्यम से प्रशिक्षुओं की शिक्षण क्षमताओं को निखारना।

दृष्टि (Vision)

  • ऐसे प्रबुद्ध और प्रगतिशील शिक्षकों को तैयार करना, जो न केवल ज्ञान का प्रसार करें बल्कि एक नैतिक और मूल्य आधारित समाज की नींव भी रखें।
  • शिक्षण के क्षेत्र में वैश्विक मानकों को स्थापित करना और ऐसे शिक्षक बनाना जो तकनीक और आधुनिक शिक्षण कौशलों में निपुण हो।
  • शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित, संवेदनशील और चरित्रवान शिक्षकों का निर्माण करना।
  • यह नई पीढ़ी एक सामंजस्यपूर्ण, समृद्ध, सुसंस्कृत और निपुण समाज के विकास के लिए प्रतिबद्ध होगी।
  • ऐसे शिक्षकों का निर्माण करना जो राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया को गति देने वाला होगा।
  • समकालीन प्रासंगिकता के अनुरूप जीवनदृष्टि, चिंतन कौशल, सामाजिक कौशल, वैज्ञानिक सोच, रचनात्मक क्षमता और दक्षता विकसित करने वाले शिक्षकों का निर्माण करना।
  • भारतीय शिक्षा दर्शन और जीवन मूल्यों की परंपरा में प्रशिक्षित एवं विकसित ऐसे युवा एक मजबूत और समृद्ध राष्ट्र की नींव रखेंगे।

“उत्कृष्ट शिक्षक, उज्ज्वल भविष्य”

महाविद्यालय प्रोफाइल

भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, सदातपुर, मुजफ्फरपुर, बिहार के एक प्रमुख बी.एड./डी.एल.एड. कॉलेजों में से एक है। इसकी स्थापना 2011 में हुई थी और यह पूरी तरह से लोक शिक्षा समिति, मुजफ्फरपुर, बिहार — विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान द्वारा संचालित और प्रबंधित है। यह महाविद्यालय बाबा साहेब भीमराव अम्बेदकर बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना से स्थायी रूप से संबद्ध है। राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा मान्यता प्राप्त और यूजीसी अधिनियम 1956, नई दिल्ली, दिनांक 07/03/2025 की धारा 2 (f) के तहत मान्यता प्राप्त है।

मुजफ्फरपुर जिसे “लीची का शहर” कहा जाता है, उत्तर बिहार का एक प्रमुख वाणिज्यिक और शैक्षणिक केन्द्र है। यह शहर बूढ़ी गंडक नदी के किनारे बसा है और अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक पहचान के लिए जाना जाता है।

आधारभूत संरचना

महाविद्यालय 4000 वर्गमीटर के विशाल भवन में स्थित है। इसमें 25 विशाल कक्षाएँ, आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित बहुउद्देशीय सभागार एवं सेमिनार हॉल, विशाल पुस्तकालय सह-वाचनालय और डिजिटल संसाधन केन्द्र मौजूद हैं। गणित, विज्ञान, मनोविज्ञान, सामाजिक विज्ञान, संगीत, शारीरिक संसाधन केंद्र, कला और शिल्प एवं ICT से संबंधित 8 विशाल प्रयोगशालाएँ हैं।

2011स्थापना वर्ष
4000 m²विशाल भवन
25विशाल कक्षाएँ
8प्रयोगशालाएँ

राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS)

राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) युवाओं को समाज सेवा, नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। NSS का उद्देश्य विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का विकास करते हुए उन्हें समाज की समस्याओं के प्रति संवेदनशील बनाना है। NSS स्वयंसेवक स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, रक्तदान, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता, साक्षरता अभियान तथा आपदा सहायता जैसे सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाते हैं।

Moto: Not me, but you (स्वयं से पहले आप)

NSS का संदेश: “सेवा, समर्पण और सामाजिक उत्थान के माध्यम से एक बेहतर भारत का निर्माण।” — युवा शक्ति – राष्ट्र शक्ति

NSS के प्रमुख उद्देश्य

  • समाज सेवा की भावना का विकास
  • नेतृत्व क्षमता का निर्माण
  • सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना जागृत करना
  • पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता को बढ़ावा देना
  • राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना

प्रमुख विशेषताएँ

  • आधुनिक बुनियादी ढांचा
  • श्रव्य-दृश्य सुविधाओं से लैस आधुनिक कक्षाएँ
  • उच्च शिक्षित, अनुभवी और समर्पित प्राध्यापकों की टीम
  • सुसज्जित प्रयोगशालाएँ
  • सेमिनार, कार्यशालाओं, सम्मेलनों और अतिथि व्याख्यानों में भाग लेने का अवसर
  • सरकारी प्राथमिक/माध्यमिक/वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में अध्यापन के लिए शिक्षणाभ्यास
  • शैक्षणिक भ्रमण
  • प्लेसमेंट सेल (रोजगार मेला)
  • पूर्व-छात्र परिषद
  • सुरक्षित वातावरण (सीसीटीवी निगरानी और एंटी रैगिंग सेल)
  • व्यक्तित्व विकास और कौशल प्रशिक्षण
  • आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी)
  • Wi-fi सुविधायुक्त कैंपस
  • बालिका मनोरंजन कक्ष
  • प्राथमिक चिकित्सा कक्ष
  • सौर ऊर्जा द्वारा संचालित कैंपस

पुस्तकालय

हमारा महाविद्यालय एक अत्याधुनिक और समृद्ध पुस्तकालय से सुसज्जित है, जो प्रशिक्षुओं की बौद्धिक प्रगति का केंद्र है। यहाँ शिक्षाशास्त्र, मनोविज्ञान और विभिन्न विषयों की हजारों पुस्तकों के साथ-साथ ई अधिगम संसाधनों की भी व्यापक उपलब्धता है। बी.एड./डी.एल.एड. पाठ्यक्रम से संबंधित पुस्तकें, सामान्य ज्ञान की पुस्तकें, सन्दर्भ पुस्तकें, विद्या भारती एवं संघ साहित्य और प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकें भी मौजूद हैं। प्रशिक्षुओं और शैक्षणिक कर्मचारियों के लिए एक विशाल और पूर्णतः शांत वाचनालय की व्यवस्था भी है।

पुस्तकालय के नियम

  • पुस्तकालय और वाचनालय के भीतर शांति बनाए रखना अनिवार्य है।
  • एक छात्र को एक बार में अधिकतम दो या तीन पुस्तकें ही निर्गत की जाएंगी।
  • पुस्तक को अधिकतम 15 (पन्द्रह) दिनों तक छात्र के पास रखने की अनुमति होगी।
  • निर्धारित तिथि के बाद पुस्तक वापस करने पर प्रतिदिन संस्थान द्वारा तय राशि का विलंब शुल्क देय होगा।
  • पुस्तक खोने या क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में छात्र को या तो नई पुस्तक या पुस्तक की बाजार कीमत और जुर्माना शुल्क जमा करनी होगी।

प्रयोगशालाएँ एवं संसाधन केन्द्र

प्रत्येक प्रयोगशाला प्रशिक्षु शिक्षकों में अलग-अलग शिक्षण कौशल विकसित करने के लिए सुसज्जित है।

कम्प्यूटर प्रयोगशाला (आईसीटी)

हाई-स्पीड इंटरनेट के साथ नवीनतम कम्प्यूटर सिस्टम। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का गहन प्रशिक्षण, ताकि प्रशिक्षु अपनी कक्षाओं को अधिक आकर्षक और प्रभावी बना सकें।

कला एवं शिल्प संसाधन केन्द्र

पेंटिंग, क्ले मॉडलिंग, ओरिगामी (कागज का मॉडल) और हस्तशिल्प के माध्यम से प्रशिक्षुओं में धैर्य, सूक्ष्म अवलोकन और नवाचार की भावना का विकास; साथ ही कला को शिक्षण में उपयोग करना सिखाया जाता है।

मनोविज्ञान प्रयोगशाला

छात्रों के व्यवहार, बुद्धि, व्यक्तित्व और अभिरुचि को मापने के लिए कई मानकीकृत परीक्षण और उपकरण। प्रशिक्षुओं को छात्रों की समस्याओं को हल करने और उचित मार्गदर्शन देने के लिए तैयार करती है।

विज्ञान प्रयोगशाला

माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के पाठ्यक्रम के अनुरूप सभी आवश्यक उपकरण और रसायन। उद्देश्य: रटने की प्रवृत्ति खत्म कर छात्रों में "क्यों" और "कैसे" पूछने की जिज्ञासा पैदा करना।

गणित प्रयोगशाला

ग्राफ बोर्ड, रोलर बोर्ड, ज्यामिति उपकरण बॉक्स, ज्यामितीय ठोसों के मॉडल, गणितीय किट आदि। "कर के सीखने" के सिद्धांत पर चार्ट, मॉडल, फ्लैशकार्ड और कम लागत वाली शिक्षण सहायक सामग्री बनाना।

सामाजिक विज्ञान प्रयोगशाला

मानचित्र, ग्लोब, मौसम विज्ञान उपकरण, सर्वेक्षण एवं मापन उपकरण, वर्किंग मॉडल और डिजिटल शिक्षण संसाधन; प्रभावी TLM विकसित करने हेतु सुव्यवस्थित मंच।

स्वास्थ्य एवं शारीरिक संसाधन केन्द्र

इनडोर (कैरम, शतरंज) और आउटडोर (बैडमिंटन, वॉलीबॉल) खेल गतिविधियाँ; टीम भावना बढ़ाने वाला वातावरण और समावेशी शिक्षा की तैयारी।

भाषा प्रयोगशाला

व्याकरण, उच्चारण और शब्दावली का व्यावहारिक प्रयोग। प्रशिक्षु अपनी आवाज़ रिकॉर्ड कर सुन सकते हैं और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में कमियाँ दूर कर सकते हैं।

संगीत प्रयोगशाला (Music Lab)

हारमोनियम, तबला, ढोलक, गिटार, झाल, मजीरा, सहनाई, बांसुरी आदि से सुसज्जित। संगीत को शिक्षण उपकरण (Teaching Tool) के रूप में उपयोग करना, एक्शन सॉन्ग और काव्यात्मक ढंग से पढ़ाना सिखाया जाता है।

पाठ्यचर्या एवं पाठ्य सहगामी गतिविधियाँ

“शिक्षण केवल किताबों तक सीमित नहीं है।” हमारे महाविद्यालय में पाठ्यचर्या और पाठ्य सहगामी गतिविधियों के बीच एक बेहतरीन संतुलन बनाया जाता है। महाविद्यालय प्रशिक्षुओं को मेहंदी, रंगोली, महापुरुषों की जयंतियाँ, एनसीटीई द्वारा निर्धारित कार्यक्रम, सड़क सुरक्षा जागरूकता, वृक्षारोपण, स्वास्थ्य जागरूकता आदि गतिविधियों तथा वाद-विवाद, भाषण, निबंध, कविता लेखन आदि प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करता है। हमारा मानना है कि एक कुशल शिक्षक वही है जो कक्षा के साथ-साथ जीवन के हर क्षेत्र में नेतृत्व कर सके।

कर्मचारी

शैक्षणिक कर्मचारी

क्र.नामपद
01डॉ. राकेश कुमार पालप्राचार्य
02डॉ. सतीश चन्द्रविभागाध्यक्ष डी.एल.एड. (इतिहास)
03डॉ. मिन्नी कुमारीसह प्राध्यापिका (इतिहास)
04डॉ. सौरभ कुमारसह प्राध्यापक (नाट्य एवं कला)
05डॉ. अनामिका रानीसह प्राध्यापिका (हिन्दी)
06श्री सरोज कुमारसह प्राध्यापक (अर्थशास्त्र)
07डॉ. हितेन्द्र कुमारसह प्राध्यापक (हिन्दी)
08श्री संजय कुमार गुप्तसह प्राध्यापक (अंग्रेजी)
09श्री शैलेन्द्र मिश्रसह प्राध्यापक (जीव विज्ञान)
10श्री मनोज कुमारसह प्राध्यापक (कला)
11श्री प्रबाल बेरासह प्राध्यापक (शारीरिक शिक्षा)
12श्री रामजी यादवसह प्राध्यापक (भूगोल)

गैर-शैक्षणिक कर्मचारी

क्र.नामपद
01श्रीमती प्रतिमा कुमारीपुस्तकालयाध्यक्षा
02श्री सतीश चन्द्र मिश्रकार्यालय प्रमुख
03श्री इन्द्रभूषण झाकार्यालय सहायक
04श्री दीपक कुमारकार्यालय सहायक
05श्री कमलेश कुमार सिंहआदेशपाल
06श्री रामलगन कुमारआदेशपाल
07श्री सोनू कुमारआदेशपाल
08श्री विनोद कुमार मल्लिकसफाईकर्मी
09श्री मंटू पासवानवाहन-चालक
10श्री दीपक कुमार (मोनू)माली

नियम एवं शर्तें

  • कक्षा-कक्ष में मोबाइल फोन का उपयोग करना सख्त वर्जित है।
  • प्रशिक्षुओं को महाविद्यालय परिसर में निर्धारित वेशभूषा में रहना अनिवार्य है।
  • प्रशिक्षुओं को प्रतिदिन महाविद्यालय का पहचान पत्र पहनकर आना है।
  • सभी प्रशिक्षुओं से अपेक्षा की जाती है कि वे नोटिस बोर्ड पर लगे सूचना को पढ़ें।
  • सभी प्रशिक्षुओं को निर्धारित अवधि के लिए आवंटित विद्यालयों में शिक्षणाभ्यास पूरा करना अनिवार्य है।

प्रस्तावित पाठ्यक्रम

बी.एड.

अवधि
2 वर्ष
इकाई
02 (संख्या – 100)
प्रवेश
CET B.Ed. बिहार सरकार
शिक्षण शुल्क
विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित

महाविद्यालय वेशभूषा

छात्राध्यापक हेतु: सोमवार से शनिवार — सफेद शर्ट एवं काला पैंट

डी.एल.एड.

अवधि
2 वर्ष
इकाई
02 (संख्या – 100)
प्रवेश
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (CET), बिहार सरकार
शिक्षण शुल्क
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा निर्धारित

महाविद्यालय वेशभूषा

छात्राध्यापिकाओं हेतु:
सोमवार से मंगलवार — महाविद्यालय द्वारा निर्धारित साड़ी सेट
बुधवार से शनिवार — गुलाबी कुर्ता, सफेद सलवार और दुपट्टा

कैंपस की झलकियाँ

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प्रवेश सत्र 2026-28 — अपनी शिक्षक यात्रा आज ही शुरू करें